पशु तस्कर की गाड़ी से अपराधी की घरपकड़, पिटते बची पुलिस?

सतना। जिले के मझगवां थाना क्षेत्र के लूट प्रकरण में फरार आरोपी की गिरफ्तारी के बाद अब पूरे घटनाक्रम ने नया मोड़ ले लिया है। सिविल लाइन तिराहे पर आरोपी को छुड़ाने के कथित प्रयास और पुलिस टीम के साथ हुई झूमाझटकी की घटना के बीच पुलिस द्वारा इस्तेमाल किए गए वाहन को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
सूत्रों के अनुसार मझगवां पुलिस जिस काले रंग की किया सोनेट वाहन क्रमांक UP 71 BE 6124 से कार्रवाई के लिए शहर पहुंची थी, उसके उपयोग और चयन को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। स्थानीय स्तर पर दावा किया जा रहा है कि वाहन का संबंध ऐसे परिवार से बताया जाता है, जिसका नाम पूर्व में विभिन्न विवादों और मामलों में सामने आता रहा है। हालांकि इन दावों की स्वतंत्र और आधिकारिक पुष्टि नहीं हो सकी है।
जानकारी के अनुसार मझगवां थाना में दर्ज लूट के मामले में फरार आरोपी अजय जायसवाल उर्फ अज्जू की तलाश में थाना प्रभारी आदित्य नारायण धुर्वे अपनी टीम के साथ शहर पहुंचे थे। आरोपी को हिरासत में लेने के बाद पुलिस टीम उसे लेकर मझगवां के लिए रवाना हुई, लेकिन सिविल लाइन तिराहे के पास कुछ लोगों ने वाहन रोककर कथित रूप से आरोपी को छुड़ाने का प्रयास किया। इस दौरान गाली-गलौज, झूमाझटकी और हाथापाई की स्थिति निर्मित हो गई।
घटना के बाद अब सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि पुलिस कार्रवाई के लिए निजी वाहन का उपयोग क्यों किया गया? यदि वाहन किराए पर लिया गया था, तो उसका सत्यापन किस स्तर पर किया गया? और क्या वाहन के मालिकाना हक तथा उसके उपयोगकर्ताओं की पृष्ठभूमि की जांच की गई थी?
पुलिस विभाग के भीतर भी इस मामले को लेकर चर्चाएं हैं। जानकारों का कहना है कि जब कार्रवाई संवेदनशील हो और आरोपी की गिरफ्तारी जैसी महत्वपूर्ण प्रक्रिया चल रही हो, तब वाहन के चयन से लेकर सुरक्षा व्यवस्था तक हर पहलू पारदर्शी होना चाहिए।
सिविल लाइन तिराहे पर हुई घटना और पुलिस द्वारा इस्तेमाल किए गए वाहन को लेकर उठ रहे सवालों के बीच अब लोगों की नजर वरिष्ठ अधिकारियों की जांच और स्पष्टीकरण पर टिकी हुई है। यदि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच होती है तो कई महत्वपूर्ण तथ्य सामने आ सकते हैं।



