धर्मनगरी चित्रकूट में अवैध प्लाटिंग और निर्माण पर कौन मेहरबान?
पुलिस अधिकारी सहित दर्जनों लोगों ने बिना अनुमति किया अवैध निर्माण, कई पहाड़ियों का भूमाफियाओं ने वजूद मिटा दिया, एसडीएम कार्यालय के बाबू ने दबा ली अतिक्रमण कारियों पर कार्रवाई की फाइल

सतना। भगवान श्रीराम की तपोस्थली चित्रकूट को श्रीराम लोक और मिनी स्मार्ट सिटी के रूप में विकसित करने की घोषणा के बीच शहर और आसपास के क्षेत्रों में कथित अवैध प्लाटिंग और निर्माण का मामला चर्चा में है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि विकास की संभावनाओं के साथ ही भूमाफियाओं की सक्रियता भी बढ़ गई है। नयागांव, रजौला और हनुमानधारा क्षेत्र में कथित तौर पर बड़े पैमाने पर अवैध प्लाटिंग का खेल चल रहा है और इन कॉलोनियों में लगातार निर्माण कार्य किए जा रहे हैं।
स्थानीय जानकारों के अनुसार कुछ रसूखदार लोगों के अलावा राजनीतिक और प्रशासनिक स्तर पर संबंध रखने वाले लोगों द्वारा कथित रूप से अपने प्रभाव का इस्तेमाल कर व्यावसायिक निर्माण कराए जा रहे हैं। आरोप है कि कई स्थानों पर बनाए जा रहे होटल और लॉज के लिए नगर परिषद से आवश्यक अनुमति और नक्शा स्वीकृत नहीं कराया गया है। इससे न केवल नगर नियोजन व्यवस्था पर सवाल खड़े हो रहे हैं, बल्कि शासकीय भूमि पर अतिक्रमण की शिकायतें भी सामने आ रही हैं।
पुलिस अधिकारी के होटल का भी आरोप
मामले को लेकर सबसे गंभीर आरोप सतना जिले के एक चर्चित पुलिस अधिकारी से जुड़े निर्माण को लेकर लगाया गया है। शिकायतकर्ताओं का दावा है कि अवैध कॉलोनी में नगर परिषद की जमीन पर तीन मंजिला होटल का निर्माण कराया गया है। आरोप है कि उक्त निर्माण के लिए नगर परिषद से कोई नक्शा स्वीकृत नहीं कराया गया। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और संबंधित पुलिस अधिकारी अथवा निर्माणकर्ता का पक्ष सामने नहीं आया है।
करोड़ों की सरकारी जमीन पर कब्जे का आरोप
स्थानीय लोगों का कहना है कि चित्रकूट जैसे धार्मिक और पर्यटन महत्व वाले क्षेत्र में सरकारी जमीनों पर कथित कब्जे का सिलसिला गंभीर चिंता का विषय है। आरोप है कि नगर परिषद और राजस्व विभाग से संबंधित जमीनों पर भी निर्माण किए जा रहे हैं। इसके बावजूद जिम्मेदार विभागों की ओर से अपेक्षित कार्रवाई नहीं होने से भूमाफियाओं के हौसले बढ़ रहे हैं। अब सवाल उठ रहा है कि क्या प्रशासनिक स्तर पर निगरानी कमजोर है या फिर प्रभावशाली लोगों के दबाव में कार्रवाई नहीं हो पा रही है।
रिपोर्ट भेजने के बाद भी कार्रवाई का इंतजार
जानकारी के अनुसार चित्रकूट नगर परिषद ने कुछ माह पहले अतिक्रमण, अवैध निर्माण और अवैध प्लाटिंग से संबंधित रिपोर्ट मझगवां एसडीएम कार्यालय को भेजी थी। इसके बाद भी कार्रवाई आगे नहीं बढ़ने का आरोप लगाया जा रहा है। शिकायतकर्ताओं ने कार्यालय में पदस्थ सत्यम सिंह नामक कर्मचारी पर रिपोर्ट को लंबित रखने का आरोप लगाया है। हालांकि कर्मचारी की भूमिका और आरोपों की पुष्टि संबंधित विभागीय जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।
चित्रकूट के तेजी से विकसित होते पर्यटन क्षेत्र को देखते हुए स्थानीय लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि अवैध प्लाटिंग, सरकारी भूमि पर कब्जे और बिना अनुमति हो रहे व्यावसायिक निर्माण की निष्पक्ष जांच कराई जाए। साथ ही दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई हो, ताकि धार्मिक नगरी की भूमि और विकास योजनाओं पर अवैध कब्जे का असर न पड़े।



