आरटीओ रवि बरेलिया का चहेता बाबू देवेन्द्र लगा रहा परिवहन विभाग को चूना…
कंपनियों के इनवाइस में छेड़छाड़ कर किया भारी वाहनों का रजिस्टे्रशन, फर्जी दस्तावेजों से 55 टन वाहनों का किया गया पंजीयन, ट्रक एसोसिएशन के पदाधिकारी ने शिकायत कर खोली पोल, क्षेत्रीय परिवहन अधिकारी की भूमिका संदिग्ध फिर भी जांच का जिम्मा...

सतना। क्षेत्रीय परिवहन कार्यालय सतना का चार्ज लेने वाले प्रभारी परिवहन अधिकारी रवि बरेलिया की सह पर विभाग को जमकर चूना लगाया जा रहा है। अधिकारी का चहेता बाबू कार्यालय में वह काम कर रहा है जिससे न केवल खुद सवालों में घिरा बल्कि परिवहन विभाग की छवि को भी खराब करने में तुला हुआ है। निजी स्वार्थ में अफसर का चहेता बाबू डंके की चोट पर इनवाइस से छेड़छाड़ कर मनमाने रजिस्ट्रेशन कर रहा है। कार्यालय में चल रहे खेल की शिकायत कलेक्टर और एमपी प्रशासन से की गई है, जिसके बाद मामले की जांच शुरू कर दी गई। ट्रक एसोसिएशन सतना के अध्यक्ष सुनील मिश्रा ने सतना कलेक्टर को शिकायत देकर आरटीओ कार्यालय में पदस्थ सहायक ग्रेड-2 देवेंद्र चौधरी के खिलाफ उच्च स्तरीय जांच और नियमानुसार कार्रवाई की मांग की है। शिकायत में दावा किया गया है कि फर्जी दस्तावेजों के आधार पर करीब 55 टन वाहनों का गलत तरीके से पंजीयन किया गया, जिससे शासन को राजस्व की क्षति होने की आशंका है।
बॉडी मेकर के फार्म में हुई छेड़छाड़
शिकायतकर्ता के अनुसार आरटीओ कार्यालय में पदस्थ कर्मचारी द्वारा नियमों का कथित दुरुपयोग करते हुए बिना उचित सत्यापन के भारी वाहनों का रजिस्ट्रेशन किया जा रहा है। शिकायत में कहा गया है कि इस प्रक्रिया से शासकीय राजस्व को लाखों रुपये का नुकसान हो रहा है और संबंधित लोगों को व्यक्तिगत लाभ पहुंचाए जाने की आशंका है। शिकायत में 15 जून 2026 का एक मामला भी विशेष रूप से दर्ज किया गया है। इसमें आरटीओ कार्यालय सतना में देवेंद्र चौधरी द्वारा दो वाहनों का पंजीयन किए जाने का उल्लेख है। आरोप है कि इन वाहनों के पंजीयन में फार्म नंबर 21 और 22 तथा टैक्स इनवॉइस कथित रूप से फर्जी तरीके से संलग्न किए गए। साथ ही बॉडी निर्माणकर्ता के फार्म 21 और 22 को भी कथित तौर पर फर्जी तरीके से एडिट कर लगाया गया। शिकायतकर्ता का दावा है कि इस प्रक्रिया से शासन को लाखों रुपये के राजस्व का नुकसान हुआ।
क्या किया गया खेल
शिकायत में सतना जिले के वाहन डीलर साई नाथ रस्तोगी तथा बल्कर निर्माता वीएसटी मोटर इंडिया कंपनी और हाईटेक सेल्यूशन की इनवॉइस की भी जांच की मांग की गई है। आरोप है कि इनवॉइस की फर्जी छायाप्रति के आधार पर वाहन मालिकों के साथ मिलकर आरटीओ कार्यालय में पंजीयन की कार्रवाई कराई गई। शिकायत में उदाहरण देते हुए बताया गया है कि एक ही इनवॉइस के आधार पर दो वाहनों का पंजीयन किए जाने का आरोप है। शिकायत के मुताबिक एक वाहन के लिए डीलर द्वारा जारी इनवॉइस नंबर एमवीआई 5732260000061 में वाहन की कीमत 56 लाख 35 हजार 800 रुपये, जबकि दूसरी इनवॉइस एमवीआई 5732260000055 में कीमत 53 लाख 2 हजार 500 रुपये और तीसरी एमवीआई 5732260000108 में 56 लाख 5 हजार 500 रुपये दर्ज होने का उल्लेख है। शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया है कि पासिंग के दौरान दो वाहनों में 30-30 लाख रुपये तथा तीसरे वाहन में 28.50 लाख रुपये की इनवॉइस लगाकर वाहनों को पास किया गया। इससे व्यापक स्तर पर अनियमितता और भ्रष्टाचार की आशंका जताई गई है। ट्रक एसोसिएशन अध्यक्ष ने कलेक्टर से पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच कराने, दस्तावेजों का सत्यापन कराने और दोषी पाए जाने वाले अधिकारी-कर्मचारी के खिलाफ नियमानुसार कठोर कार्रवाई करने की मांग की है। उन्होंने कहा कि जांच के दौरान आवश्यक साक्ष्य और दस्तावेज उपलब्ध कराने के लिए वे तैयार हैं। शिकायतकर्ता ने जनहित को ध्यान में रखते हुए मामले में शीघ्र कार्रवाई की अपेक्षा जताई है।
डिप्टी टीसी ने दिए जांच के आदेश
बताया जाता है कि शिकायत के बाद मामला उच्च स्तर पर पहुंचा लिहाजा परिवहन विभाग की डिप्टी टीसी ने प्रकरण की जांच के निर्देश दिए। लेकिन यहां भी एक कमाल यह किया गया कि जांच उसी अधिकारी को सौंप दी गई जिसकी भूमिका सवालों में घिरी हुई है। बताया जाता है कि डिप्टी टीसी ने सात दिन के अंदर रिपोर्ट देने को कहा है। सूत्रों की माने तो बाबू देवेन्द्र चौधरी बिना अधिकारी की सहमति के यह खेल नहीं कर सकता लिहाजा इसकी जांच किसी अन्य सक्षम अधिकारी से कराए जाने की आवश्यकता थी। बताया जाता है कि भारी वाहनों के रजिस्ट्रेशन में छह प्रतिशत का टैक्स विभाग लेता है। लिहाजा यहां पर कंपनी की इनवाइस में बदलाव किया गया ताकि निजी स्वार्थ साधे जा सकें।



