सावधान! अब आपकी आवाज़ भी सुरक्षित नहीं, इस तकनीक से लोगों को बना रहे शिकार साइबर ठग…

सतना। साइबर अपराधी अब ठगी के लिए लगातार नई तकनीकों का सहारा ले रहे हैं। पहले जहां फर्जी कॉल और लिंक भेजकर लोगों को निशाना बनाया जाता था, वहीं अब एआई आधारित आवाज़ की नकल के जरिए किसी भी व्यक्ति की आवाज़ हूबहू तैयार कर लोगों से रुपये ठगे जा रहे हैं। इस नई तकनीक ने साइबर अपराध को और अधिक चुनौतीपूर्ण बना दिया है। सतना पुलिस ने नागरिकों से अपील की है कि यदि किसी परिचित, रिश्तेदार या मित्र की आवाज़ में अचानक पैसों की मांग करने वाला फोन आए तो केवल आवाज़ पर भरोसा न करें। कोई भी आर्थिक लेन-देन करने से पहले संबंधित व्यक्ति की पहचान वीडियो कॉल या किसी अन्य विश्वसनीय माध्यम से अवश्य सुनिश्चित करें।
सतना पुलिस अधिकारियों के अनुसार साइबर ठग सोशल मीडिया, वीडियो और ऑडियो क्लिप से किसी व्यक्ति की आवाज़ का नमूना जुटाकर कृत्रिम बुद्धिमत्ता की मदद से उसकी बिल्कुल मिलती-जुलती आवाज़ तैयार कर लेते हैं। इसके बाद दुर्घटना, बीमारी, गिरफ्तारी या किसी अन्य आपात स्थिति का बहाना बनाकर तत्काल पैसे भेजने का दबाव बनाते हैं। कई लोग परिचित की आवाज़ सुनकर बिना पुष्टि किए रकम भेज देते हैं और ठगी का शिकार हो जाते हैं।
तत्काल पुलिस से लें सहायत
सतना पुलिस लगातार साइबर जागरूकता अभियान चलाकर लोगों को डिजिटल सुरक्षा के प्रति सचेत कर रही है। स्कूलों, कॉलेजों, सार्वजनिक कार्यक्रमों और सोशल मीडिया के माध्यम से नागरिकों को साइबर अपराध के नए तरीकों की जानकारी दी जा रही है। इसके बावजूद प्रतिदिन साइबर ठगी के मामले सामने आ रहे हैं। पुलिस का कहना है कि जागरूकता और सतर्कता ही इस तरह के अपराधों से बचने का सबसे प्रभावी उपाय है। पुलिस ने लोगों से अपील की है कि किसी भी अनजान लिंक पर क्लिक न करें एक बार उपयोग होने वाला पासवर्ड (ओटीपी), बैंक खाते की जानकारी, यूपीआई पिन या अन्य गोपनीय जानकारी किसी के साथ साझा न करें। यदि किसी कॉल या संदेश पर संदेह हो तो घबराकर कोई भुगतान न करें बल्कि पहले उसकी सत्यता की पुष्टि करें।
यदि किसी व्यक्ति को साइबर ठगी की आशंका हो या वह साइबर अपराध का शिकार हो जाए, तो बिना देर किए राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर शिकायत दर्ज कराएं या राष्ट्रीय साइबर अपराध शिकायत पोर्टल पर ऑनलाइन शिकायत करें। साथ ही नजदीकी पुलिस थाने या साइबर प्रकोष्ठ से तत्काल संपर्क करें। समय पर सूचना मिलने पर ठगी गई राशि को रोकने या वापस दिलाने की संभावना बढ़ जाती है।



