सीईओ सहित 6 कर्मचारियों पर ईओडब्ल्यू में FIR दर्ज…
111 अपात्र व्यक्तियों के नाम बीपीएल सूची में जोड़ने का आरोप

सतना। आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (ईओडब्ल्यू) रीवा ने जनपद पंचायत मैहर में बीपीएल सूची में अनियमित रूप से अपात्र व्यक्तियों के नाम जोड़ने, फर्जी बीपीएल प्रमाण पत्र जारी करने तथा शासन की गरीब हितैषी योजनाओं में भ्रष्टाचार किए जाने के मामले में गंभीर कार्रवाई करते हुए आपराधिक प्रकरण दर्ज किया है। जांच में प्रथम दृष्टया भ्रष्टाचार, कर्तव्य में लापरवाही और शासन को आर्थिक क्षति पहुंचाने के पर्याप्त साक्ष्य मिलने पर तत्कालीन एवं वर्तमान अधिकारियों-कर्मचारियों के विरुद्ध मामला पंजीबद्ध कर विवेचना शुरू कर दी गई है।
प्रकरण की शुरुआत प्रकोष्ठ मुख्यालय भोपाल को प्राप्त एक शिकायत से हुई थी, जिसमें आरोप लगाया गया था कि जनपद पंचायत मैहर द्वारा निर्धारित प्रक्रिया का पालन किए बिना अपात्र व्यक्तियों को गरीबी रेखा के नीचे (बीपीएल) सूची में शामिल किया गया। शिकायत में यह भी आरोप था कि फर्जी बीपीएल प्रमाण पत्र जारी किए गए तथा एक ही बीपीएल क्रमांक पर दो अलग-अलग हितग्राहियों के नाम दर्ज कर अनियमित लाभ प्रदान किया गया।
ईओडब्ल्यू द्वारा की गई जांच में सामने आया कि पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के निर्देशों के विपरीत बीपीएल सूची का विधिवत संधारण नहीं किया गया। जांच में पाया गया कि पटवारी सर्वे रिपोर्ट एवं तहसीलदार के सत्यापन अथवा लिखित अनुशंसा के बिना ही कई व्यक्तियों के नाम बीपीएल सूची में जोड़ दिए गए। अब तक की जांच में कुल 111 ऐसे हितग्राही चिन्हित किए गए हैं, जिन्हें नियमों के विपरीत फर्जी बीपीएल प्रमाण पत्र जारी किए गए।
जांच एजेंसी के अनुसार इन अपात्र व्यक्तियों ने वर्ष 2018 से लेकर वर्तमान तक शासन की विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं का लाभ प्राप्त किया। बीपीएल श्रेणी के आधार पर मिलने वाली सुविधाओं और आर्थिक सहायता का अनुचित लाभ उठाकर शासन को आर्थिक क्षति पहुंचाई गई। इससे वास्तविक पात्र गरीब हितग्राहियों के अधिकार भी प्रभावित हुए।
मामले में प्रथम दृष्टया अपराध प्रमाणित पाए जाने पर जनपद पंचायत मैहर के तत्कालीन मुख्य कार्यपालन अधिकारी वेदमणि मिश्रा, आर.एन. शर्मा, सहायक विकास विस्तार अधिकारी प्रेमलाल गौतम, तत्कालीन विकास खंड अधिकारी सुदामा प्रसाद चौरसिया, तत्कालीन बीपीएल प्रभारी दीपक मिश्रा तथा वर्तमान बीपीएल प्रभारी रामसुन्दर मिश्रा सहित अन्य संबंधित व्यक्तियों के विरुद्ध आपराधिक प्रकरण दर्ज किया गया है।
आरोपियों के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 420 (धोखाधड़ी), 409 (लोक सेवक द्वारा आपराधिक न्यास भंग), 120-बी (आपराधिक षड्यंत्र) तथा भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 1988 (संशोधित 2018) की धारा 13(1)(ए) एवं 13(2) के तहत अपराध पंजीबद्ध किया गया है।
ईओडब्ल्यू रीवा ने मामले को विवेचना में लेकर यह पता लगाने की प्रक्रिया शुरू कर दी है कि इस पूरे फर्जीवाड़े में और कौन-कौन लोग शामिल थे तथा शासन को वास्तविक रूप से कितनी आर्थिक क्षति हुई। जांच के आगे बढ़ने के साथ इस मामले में और भी खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है।



