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मौत के कुए का रहस्य और गहराया! वैज्ञानिकों के दावे पर ग्रामीणों ने किया ऐसा प्रयोग, देख सब रहगए हक्के-बक्के…

सतना। मैहर जिले के अमरपाटन क्षेत्र के खरमसेड़ा गांव में कुएं में उतरे तीन युवकों की दर्दनाक मौत के बाद अब हादसे के कारणों को लेकर चर्चा और प्रयोगों का दौर जारी है। वैज्ञानिकों की टीम का कहना है कि कुएं के भीतर मीथेन जैसी जहरीली गैस जमा होने से ऑक्सीजन का स्तर कम हो गया था, जिसके कारण युवकों की दम घुटने से मौत हुई। हालांकि गांव के कई लोग इस निष्कर्ष से अब भी सहमत नहीं हैं।
घटना शुक्रवार शाम उस समय हुई थी, जब कुएं में गिरे एक बैल को निकालने के लिए पहले एक युवक नीचे उतरा। उसके बाहर नहीं आने पर उसे बचाने के लिए दो अन्य युवक भी कुएं में उतर गए। कुछ ही देर में तीनों अचेत हो गए। ग्रामीणों ने उन्हें बाहर निकालने का प्रयास किया, लेकिन तब तक उनकी मौत हो चुकी थी। इस हादसे ने पूरे गांव को शोक में डुबो दिया।
घटना के बाद मौके पर पहुंची विशेषज्ञों की टीम ने प्रारंभिक जांच में कुएं के भीतर जहरीली गैस की मौजूदगी की संभावना जताई। वैज्ञानिकों का दावा है कि लंबे समय तक बंद और गहरे कुएं में मीथेन गैस जमा हो सकती है, जिससे ऑक्सीजन का स्तर घट जाता है और अंदर जाने वाले व्यक्ति का दम घुट सकता है।
वहीं दूसरी ओर ग्रामीणों का कहना है कि यदि कुएं में वास्तव में इतनी खतरनाक गैस थी तो प्रशासन ने उसे तत्काल बंद क्यों नहीं कराया। इसी संशय के चलते कुछ ग्रामीणों ने लकड़ी का एक मचान तैयार किया और उस पर एक बकरी को रस्सी से बांधकर कुएं में उतार दिया। उनका उद्देश्य यह देखना था कि कुएं के भीतर गैस का असर होता है या नहीं। हालांकि बकरी को कुछ ही देर बाद सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया, जिससे उसे कोई नुकसान नहीं हुआ।
मौके का वीडिओ
प्रशासन ने ग्रामीणों से इस तरह के जोखिम भरे प्रयोग नहीं करने की अपील की है। अधिकारियों का कहना है कि हादसे के वास्तविक कारणों की पुष्टि विस्तृत वैज्ञानिक जांच और पोस्टमार्टम रिपोर्ट के आधार पर ही की जाएगी। फिलहाल पूरे क्षेत्र में इस घटना को लेकर तरह-तरह की चर्चाएं जारी हैं, जबकि प्रशासन लोगों से कुएं के पास अनावश्यक भीड़ न लगाने और सुरक्षा बरतने की अपील कर रहा है।



