मध्य प्रदेशसतना

दो दिन में डीईओ सलोनी शर्मा को मिले दो नोटिस

सीएम हेल्पलाइन का निराकरण नहीं करने पर कलेक्टर ने, गोपनीय चरित्रावली नहीं भेजने पर जेडी ने थमाया शोकॉज

सतना। जिले की नई जिला शिक्षा अधिकारी सलोनी शर्मा पर इन दिनों नोटिसों की बौछार हो रही है। प्रभार संभालने के बाद जितने नोटिस उन्होंने अपने मातहतों को नहीं दिए, उससे कहीं अधिक उन्हें वरिष्ठ अधिकारियों की ओर से मिल चुके हैं। पिछले दो दिनों में डीईओ सलोनी शर्मा को दो कारण बताओ सूचना पत्र मिले हैं। पहले मैहर कलेक्टर बिदिशा मुखर्जी ने नोटिस जारी किया, उसके अगले दिन संयुक्त संचालक, लोक शिक्षण, रीवा संभाग की ओर से भी कारण बताओ सूचना पत्र जारी कर दिया गया। फिलहाल डीईओ इन नोटिसों का जवाब तैयार करने में जुटी हैं।

बताया जाता है कि सतना में पदस्थापना के साथ ही सलोनी शर्मा को मैहर जिले का भी प्रभार मिला हुआ है। हाल ही में कलेक्टर ने वहां दर्ज सीएम हेल्पलाइन की शिकायतों के निराकरण की समीक्षा की। इस दौरान पाया गया कि जून माह की शिकायतों के संतुष्टिपूर्वक निराकरण का प्रतिशत मात्र 44.27 रहा। इस पर नाराजगी जताते हुए कलेक्टर ने दो दिन के भीतर जवाब प्रस्तुत करने के निर्देश दिए। इस नोटिस में केवल डीईओ का नाम ही नहीं है, बल्कि डीपीसी से भी जवाब तलब किया गया है।

उच्च श्रेणी शिक्षकों की गोपनीय चरित्रावली नहीं भेजी
उल्लेखनीय है कि इन दिनों कर्मचारियों की पदोन्नति की प्रक्रिया चल रही है। इस दौरान सभी कर्मचारियों की गोपनीय चरित्रावली मंगाई जा रही है। संयुक्त संचालक ने सतना और मैहर जिले के उच्च श्रेणी शिक्षक संवर्ग की गोपनीय चरित्रावली फीड कराने के लिए विशेष शिविर आयोजित किया था, ताकि समय पर प्रक्रिया पूरी हो सके। इसके बावजूद सतना जिले से केवल 101 कर्मचारियों की जानकारी वरिष्ठ कार्यालय को भेजी गई, जबकि कुल 312 कर्मचारी हैं। इस पर नाराजगी जताते हुए संयुक्त संचालक ने तत्काल शेष जानकारी उपलब्ध कराने तथा दो दिन के भीतर लिखित जवाब प्रस्तुत करने के निर्देश दिए।

अनुशासनात्मक कार्रवाई की चेतावनी
संयुक्त संचालक ने डीईओ के इस रवैये पर नाराजगी जताते हुए कहा कि यह पदीय दायित्वों के विपरीत है। यदि समय पर जवाब प्रस्तुत नहीं किया जाता है, तो उनके विरुद्ध अनुशासनात्मक कार्रवाई का प्रस्ताव उच्च कार्यालय को भेजा जाएगा, जिसके लिए वे स्वयं जिम्मेदार होंगी। ज्ञात हो कि सलोनी शर्मा का मूल पद सहायक संचालक का है और उन्हें पहली बार जिला शिक्षा अधिकारी का प्रभार मिला है। दो जिलों का कार्य एक साथ संभालने में संभवतः उन्हें कठिनाई हो रही है।

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