चेक डैम घोटाला: रिटायर्ड इंजीनियर समेत 5 जिम्मेदारों से 11.10 लाख की वसूली के आदेश
ग्राम लखमद के निर्माण कार्य में की गई थी अनियमितता

सतना। जिले के जनपद पंचायत उचेहरा की ग्राम पंचायत जाखी के ग्राम लखमद में वर्ष 2018-19 में निर्मित चेक डैम निर्माण में गंभीर अनियमितताओं के मामले में जिला पंचायत सतना के मुख्य कार्यपालन अधिकारी एवं विहित प्राधिकारी ने विस्तृत सुनवाई के बाद कुल 11,10,913 रुपये की वसूली का आदेश जारी किया है। साथ ही निर्धारित समय में राशि जमा नहीं करने पर पंचायत राज अधिनियम की धारा 92 के तहत कार्रवाई, जेल वारंट तथा एफआईआर दर्ज कराने की चेतावनी भी दी गई है।
आदेश के अनुसार, सहायक यंत्री जनपद पंचायत उचेहरा के पत्र के आधार पर वर्ष 2024 में जांच कराई गई। जांच दल ने स्थल निरीक्षण एवं अभिलेखों के परीक्षण के बाद पाया कि चेक डैम का निर्माण गुणवत्ताविहीन सामग्री से किया गया। डैम की विंग वॉल पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो चुकी है, मेन वॉल में दरारें हैं, साइड वॉल टूटी हुई है तथा संरचना अनुपयोगी हो गई है। जांच में यह भी सामने आया कि निर्माण स्थल हाइड्रोलिक डिजाइन के अनुरूप उपयुक्त नहीं था और निर्धारित मानकों का पालन नहीं किया गया।
प्रकरण में संबंधित अधिकारियों एवं कर्मचारियों को कई बार नोटिस जारी कर जवाब देने का अवसर दिया गया। उपयंत्री धर्मेन्द्र कुमार कोरी, ग्राम पंचायत सचिव बुजकिशोर द्विवेदी तथा रोजगार सहायक लखन प्रजापति ने अपने-अपने जवाब प्रस्तुत किए, लेकिन जिला पंचायत ने उनके तर्कों को स्वीकार योग्य नहीं माना। आदेश में कहा गया कि निर्माण कार्य की तकनीकी निगरानी, सामग्री की गुणवत्ता की जांच तथा दोषपूर्ण निर्माण रोकने की जिम्मेदारी तकनीकी अमले की थी, जिसका निर्वहन नहीं किया गया। वहीं तत्कालीन सरपंच द्रोपती बाई और तत्कालीन सहायक यंत्री समीर कुमार श्रीवास्तव सुनवाई के दौरान उपस्थित नहीं हुए।
इनसे होगी राशि की रिकवरी
जिला पंचायत ने निर्माण कार्य को पूर्णतः अनुपयोगी मानते हुए कुल 11,10,913 रुपये की वसूली का आदेश जारी किया है। इसके तहत तत्कालीन उपयंत्री धर्मेन्द्र कुमार कोरी, तत्कालीन सहायक यंत्री समीर कुमार श्रीवास्तव, तत्कालीन सरपंच द्रोपती बाई, सचिव बुजकिशोर द्विवेदी तथा रोजगार सहायक लखन प्रजापति से 2,22,183 रुपये तथा रोजगार सहायक से 2,22,181 रुपये वसूलने के निर्देश दिए गए हैं।
आदेश में स्पष्ट किया गया है कि सभी संबंधित पक्षों को 10 दिन के भीतर निर्धारित राशि जमा करनी होगी। समयसीमा में राशि जमा नहीं होने पर संबंधितों के विरुद्ध पंचायत राज अधिनियम की धारा 92 के तहत वैधानिक कार्रवाई करते हुए जेल वारंट जारी किया जाएगा तथा पुलिस में एफआईआर दर्ज कराने की प्रक्रिया भी शुरू की जाएगी।



