मध्य प्रदेशसतना

क्रिस्तुकुला मिशन स्कूल की संवेदनहीनता! जोनल स्पोर्ट्स मीट में खिलाड़ियों को दिनभर रखा भूखा, स्कूल स्टाफ उड़ाता रहा दावत…

सतना। क्रिस्तुकुला मिशन हायर सेकेंडरी स्कूल में बीते 25 और 26 जून को CISCE जोनल स्पोर्ट्स मीट का आयोजन किया गया था। इस दो दिवसीय खेल प्रतियोगिता में सिंगरौली, जबलपुर, कोठी और सतना की कई टीमों ने वॉलीबॉल, बास्केटबॉल और फुटबॉल प्रतियोगिता के बालक एवं बालिका वर्ग में बड़े उत्साह के साथ भाग लिया। लेकिन दूसरे दिन स्कूल प्रबंधन की एक बड़ी लापरवाही और संवेदनहीनता सामने आई है, जिसने बच्चों के खेल भावना और अभिभावकों के भरोसे को गहरा आघात दिया है।

12 घंटे तक भूखे-प्यासे रहे घर के बच्चे

प्रतियोगिता के दूसरे दिन स्कूल प्रबंधन द्वारा सख्त आदेश जारी कर सभी प्रतिभागी बच्चों को सुबह 6 बजे से लेकर शाम 6 बजे तक अनिवार्य रूप से विद्यालय में ही रहने को कहा गया था। कड़े नियमों के चलते बच्चे तय समय पर स्कूल पहुंच गए। हैरानी की बात यह रही कि बाहर से आई खेल टीमों के लिए तो विद्यालय प्रबंधन द्वारा सुबह का नाश्ता, दोपहर का खाना और शाम के स्नैक्स की बकायदा अच्छी व्यवस्था की गई थी, लेकिन इसी स्कूल की तरफ से खेल में शामिल होने वाले मेजबान खिलाड़ियों और बच्चों को सुबह से लेकर शाम तक पूरी तरह भूखा रखा गया। संवेदनहीनता की हद तो तब हो गई जब भीषण गर्मी के इस मौसम में बच्चों को पीने के लिए ठंडा पानी तक उपलब्ध नहीं कराया गया।

शिक्षिकाओं ने उठाई आवाज, तो प्रबंधन ने करा दिया चुप

नाम न छापने की शर्त पर कुछ बेहद परेशान और आक्रोशित अभिभावकों ने बताया कि खेल के मैदान में दौड़ते-भागते जब कक्षा 6वीं के कुछ छोटे बच्चे भूख से बेहाल हो गए, तो वे हिम्मत जुटाकर अपने शिक्षकों के पास पहुंचे। बच्चों ने रोते हुए अपने भूखे होने की बात कही। मासूमों की यह हालत देखकर स्कूल की कुछ महिला शिक्षिकाओं का दिल पसीज गया और उन्होंने तुरंत प्रबंधन के पास जाकर बच्चों के लिए भोजन की व्यवस्था करने का अनुरोध किया। लेकिन संवेदनहीनता की पराकाष्ठा देखिए कि स्कूल प्रबंधन ने उन शिक्षिकाओं की बात सुनने के बजाय उन्हें डांटकर चुप करा दिया और मामले को दबा दिया।

स्टाफ करता रहा भोजन,तमाशा देखते रहे जिम्मेदार

अभिभावकों का आरोप है कि बेशर्मी की हद तो तब पार हो गई जब एक तरफ देश के भविष्य और स्कूल का नाम रोशन करने वाले खिलाड़ी बच्चे सुबह से शाम तक भूखे पेट तड़पते रहे, वहीं दूसरी तरफ स्कूल में कार्यरत शिक्षक, ऑफिस स्टाफ और विद्यालय प्रबंधन के आला अधिकारी खुद के लिए मंगाए गए शाही नाश्ते और दोपहर के लंच का लुत्फ उठा रहे थे। किसी भी जिम्मेदार अधिकारी या शिक्षक ने उन भूखे बच्चों की सुध लेना मुनासिब नहीं समझा। गौर तलब है कि “स्कूल प्रबंधन फीस के नाम पर तो हर साल मोटी रकम वसूलता है। लेकिन जब बच्चों को बुनियादी सुविधाएं और वह सम्मान देने की बारी आती है जिसके वे हकदार हैं, तो हाथ खींच लिए जाते हैं। खेल के नाम पर बच्चों को 12 घंटे भूखा रखना प्रताड़ना नहीं तो और क्या है?

पीटीएम (PTM) में घेराव की तैयारी
इस पूरी घटना के बाद से स्कूली बच्चों के माता-पिता में भारी आक्रोश व्याप्त है। कई अभिभावकों ने तीखा रोष व्यक्त करते हुए कहा है कि वे इस पूरे मामले को ठंडे बस्ते में नहीं जाने देंगे। आगामी ‘पेरेंट्स-टीचर मीटिंग’ (PTM) में इस संवेदनहीन व्यवहार के खिलाफ स्कूल प्रशासन के सामने अपना कड़ा विरोध दर्ज कराया जाएगा और प्रबंधन से लिखित में जवाब मांगा जाएगा।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button