मध्य प्रदेशसतना

करोड़ों की इस सरकारी जमीन पर दबंगों ने कर लिया कब्जा..

सतना। स्मार्ट सिटी डेवलपमेंट क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले ग्राम सोनौरा में शासकीय भूमि पर कथित अवैध कब्जे का मामला सामने आया है। आरोप है कि मध्य प्रदेश शासन के नाम दर्ज सरकारी जमीन पर वर्षों से कब्जा बना हुआ है, लेकिन जिला प्रशासन और संबंधित विभाग अब तक प्रभावी कार्रवाई नहीं कर सके हैं। इससे सरकारी भूमि की सुरक्षा व्यवस्था और प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर सवाल उठने लगे हैं। यह स्थिति तब है जब जमीनों पर दबंगों के अवैध कब्जे की शिकायत क्रमांक 36928680, 39819596 सीएम हेल्पलाइन में दर्ज हैं।

जानकारी के अनुसार राजस्व अभिलेखों में तहसील सतना शहर (रघुराजनगर) के पटवारी हल्का सिजहटा के ग्राम सोनौरा की आराजी क्रमांक 124, 125, 126 एवं 278 मध्य प्रदेश शासन के नाम दर्ज हैं। इसके बावजूद इन भूखंडों पर लोगों ने मकान बनाकर स्थायी रूप से निवास करना शुरू कर दिया है। बताया जा रहा है कि करीब एक एकड़ से अधिक शासकीय भूमि पर एक ही परिवार ने कब्जा कर बाउंड्रीवाल का निर्माण करा लिया है। वहीं अब तक तीन पक्के मकानों का निर्माण भी हो चुका है।

पूर्व में जारी हुए थे नोटिस

सूत्रों के मुताबिक, जब स्मार्ट सिटी डेवलपमेंट अथॉरिटी द्वारा इस क्षेत्र की भूमि का अधिग्रहण किया जा रहा था, तब संबंधित कब्जाधारियों को नोटिस जारी कर जमीन खाली करने के निर्देश दिए गए थे। इसके बावजूद कथित अतिक्रमण हटाने की दिशा में कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई और कब्जा आज भी बरकरार है। गौरतलब है कि इसी क्षेत्र में सड़क किनारे स्थित अन्य शासकीय आराजियों पर प्रशासन द्वारा तार फेंसिंग कर भूमि को सुरक्षित किया जा रहा है। ऐसे में सवाल उठ रहे हैं कि आराजी क्रमांक 124, 125, 126 और 278 को इस प्रक्रिया से बाहर क्यों रखा गया।

करोड़ों में है जमीनों की कीमत

स्थानीय लोगों का कहना है कि इस संबंध में कई बार शिकायतें की गईं, लेकिन जिम्मेदार अधिकारियों की उदासीनता के कारण मामला आगे नहीं बढ़ सका। जिस भूमि पर कब्जे की बात कही जा रही है, उसकी वर्तमान बाजार कीमत करोड़ों रुपये बताई जा रही है।
यदि यह भूमि शासन के नाम दर्ज है, तो उस पर कथित अतिक्रमण हटाने और सरकारी संपत्ति की सुरक्षा के लिए समान कार्रवाई क्यों नहीं की जा रही। अब स्थानीय नागरिकों की नजर जिला प्रशासन की आगामी कार्रवाई पर टिकी है। यदि आरोप सही पाए जाते हैं, तो शासकीय भूमि को अतिक्रमण से मुक्त कराना प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती होगी।

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