मध्य प्रदेशसतना

एसडीएम की मनमर्जी का खामियाजा कलेक्टर को भोगना पड़ा… जानिए क्यों ग्रामीणों ने घेरा

सतना। जिले की रामपुर बाघेलान तहसील में मंगलवार को जनसुनवाई के बाद उस समय हंगामे की स्थिति बन गई, जब कलेक्टर डॉ. सतीश कुमार एस वापस लौटने लगे। कलेक्टर के बाहर निकलते ही आवेदन लेकर पहुंचे ग्रामीण नारेबाजी करते हुए उनकी गाड़ी के सामने खड़े हो गए और रास्ता रोक लिया। इस दौरान प्रदर्शनकारियों ने रामपुर बघेलान के एसडीएम को हटाने की मांग करते हुए प्रशासन के खिलाफ नाराजगी जताई। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए रामपुर बघेलान थाना पुलिस को मौके पर मोर्चा संभालना पड़ा, जिसके बाद कलेक्टर वहां से रवाना हो सके। यहां सबसे बड़ा सवाल यही है कि आमजनता के निशाने पर कलेक्टर क्यों आ गए? यदि स्थानीय लोगों की माने तो राजस्व विभाग में मनमानी हो रही हैं। पटवारी बे लगाम है। एसडीएम सुभाष मिश्रा के द्वारा जनसुनवाई तो दूर आवेदनों को कोई महत्व नहीं दिया जाता। इसी बात से ग्रामीण भड़के हुए थे और उनके आक्रोश का खामियाजा कलेक्टर को भोगना पड़ा। कलेक्टर डॉ सतीश कुमार ने जब से सतना की कमान संभाली तब से उन्होंने जनता की व्यक्तिगत सुनवाई को महत्व दिया है और जनता उनसे काफी उम्मीद करती है कि उनके प्रकरण निराकृत होंगे।

जानकारी के अनुसार रामपुर बाघेलान में प्रत्येक मंगलवार को नियमित जनसुनवाई नहीं होती। मंगलवार को कलेक्टर के तहसील पहुंचकर जनसुनवाई करने की सूचना मिलते ही क्षेत्र के विभिन्न गांवों से सैकड़ों ग्रामीण अपनी शिकायतें लेकर पहुंच गए। कलेक्टर ने करीब दो दर्जन लोगों की समस्याएं सुनीं और संबंधित अधिकारियों को आवश्यक निर्देश दिए। इसके बाद जैसे ही वे वापस जाने लगे, बड़ी संख्या में शिकायतकर्ता आक्रोशित हो गए।
ग्रामीणों का कहना था कि कलेक्टर के चले जाने के बाद उनकी शिकायतों की सुनवाई नहीं हो पाएगी। इसी वजह से उन्होंने नारेबाजी करते हुए कलेक्टर के वाहन को रोक लिया और अपनी समस्याओं के तत्काल समाधान की मांग की। प्रदर्शन के दौरान एसडीएम को हटाने की मांग भी प्रमुखता से उठाई गई।

पांच माह से राशन नहीं मिला

प्रदर्शन में सबसे अधिक संख्या तपा गांव के हितग्राहियों की थी। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि गांव के कोटेदार ने करीब 600 उपभोक्ताओं को पिछले पांच माह से राशन नहीं दिया। उनका कहना था कि कई हितग्राहियों के फिंगरप्रिंट लेने के बावजूद उन्हें खाद्यान्न नहीं मिला। ग्रामीणों का आरोप है कि कई बार शिकायत करने के बाद भी कोई कार्रवाई नहीं हुई, जिससे वे सीधे कलेक्टर के समक्ष अपनी बात रखने पहुंचे। ग्रामीणों ने राजस्व मामलों में भी लापरवाही का आरोप लगाया। बताया गया कि क्षेत्र के हल्का पटवारी को पहले ही राजस्व प्रकरणों में लापरवाही के आरोपों के चलते निलंबित किया जा चुका है। मंगलवार की घटना ने तहसील स्तर पर शिकायतों के निराकरण और जनसुनवाई व्यवस्था की प्रभावशीलता पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button