इंजीनियर सिर्फ वसूली एजेंट, भोपाल तक सब का कमीशन सेट.. इस इंजीनियर की जुबानी सुने कैसे होता है खेल..
जीआरएस से लेकर सीईओ तक का परसेंटेज तय, भोपाल वालों पर लगाए सूटकेस लेने के आरोप

सतना। फोनपे पर कमीशन की राशि लेने और बंदूक लेकर साइट का निरीक्षण करने के मामले में सेक्टर से हटाए गए संविदा इंजीनियर सतीश समेले ने मीडिया में बड़ा दावा किया है। उन्होंने करीब साढ़े छह मिनट का बयान दिया और हर बिंदु पर अपनी बेबाक राय रखी। उन्होंने कमीशन के खेल का बड़ा दावा किया है। इंजीनियर के मुताबिक ग्राम पंचायत के जीआरएस से लेकर जनपद के सीईओ तक और विभिन्न प्रकार के निरीक्षण और दौरों पर आने वाले भोपाल में बैठे अधिकारी सभी कमीशन लेते हैं। जीआरएस और अन्य अधिकारी परसेंटेज लेते हैं जबकि भोपाल में बैठे अधिकारी सूटकेस लेते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि इंजीनियर केवल वसूली एजेंट हैं, बाकी सभी लोग कमीशन लेते हैं। उन्होंने कहा कि ऐसा कोई माई का लाल नहीं है जो हनुमानजी के सामने अपने बेटे की कसम खाकर यह कहे कि मैं कमीशन नहीं लेता हूं। उन्होंने कहा कि मेरे पास सभी के सबूत हैं और मैं आने वाले दिनों में कोर्ट के समक्ष सभी सबूत प्रस्तुत करूंगा। उन्होंने दावा किया कि मेरे पास अधिकारियों की वॉइस रिकॉर्डिंग है और वीडियो है कब-कब चंदा देना पड़ा यह सारे सबूत कोर्ट में रखूंगा।
इंजीनियर सतीश समेले
जिला पंचायत में लगता है 10 से 15 प्रतिशत कमीशन
संविदा इंजीनियर ने जिला पंचायत के अफसर पर निशाना साधते हुए कहा कि यहां कोई भी ग्रांट के काम कराए जाएं बिना कमीशन काम नहीं होता। यह लोग मेरे ऊपर 10 प्रतिशत कमीशन लेने का आरोप लगाते हैं जो, निराधार है। जबकि यहां 10 से 15 प्रतिशत हर काम का लगता है। चाहे वह डीएमएफ का हो या फिर किसी अन्य ग्रांट का बिना कमीशन के जिला पंचायत में कोई काम नहीं होता। उन्होंने कहा कि जीआरएस तीन प्रतिशत, सरपंच 20 प्रतिशत, सचिव पांच प्रतिशत, इंजीनियर तीन प्रतिशत, एई दो प्रतिशत और सीईओ पांच प्रतिशत कमीशन लेते हैं।
भालू और दुश्मनों के डर से रखा बंदूक
इंजीनियर सतीश समेले ने पूरी बेबाकी से अपनी बात रखते हुए कहा कि तमाम लोग बंदूक रखने पर सवाल उठाते हैं। जबकि मेरी लायसेंसी बंदूक है और 2028 तक पूरे मध्य प्रदेश में वैध है। उन्होंने कहा कि इंजीनियर बनने से पहले वह पत्रकारिता करते थे, तमाम माफियाओं और दबंगों के खिलाफ समाचार प्रकाशित किया, जिससे उनके कई दुश्मन हैं। उन्होंने कहा कि पिता राजनीति में सक्रिय रहे पत्नी अभी भी पत्रकारिता करती हैं ऐसे में दुश्मनों की भरमार है। अपनी सुरक्षा के लिए बंदूक रखता हूं। साइट भ्रमण करने के पीछे का कारण यह था कि हिरौंदी सूनसान इलाका है। यहां भालू की लोकेशन थी इसलिए शस्त्र हाथ में लिया था।
शायराना अंदाज भी दिखा
उन्होंने कहा कि जब उसूलों पर आंच आये तो टकराना भी जरूरी है। अगर हम जिंदा इंसान हैं तो जिंदा नजर आना जरूरी है। हम तो हर वक्त तैयार हैं सहादत के लिए,मगर खून में जोश चाहिए बगावत के लिए।मेरे जुनून का नतीजा जरूर निकलेगा इस समुंदर से नूर जरूर निकेगा।
क्या था मामला
उल्लेखनीय है कि मझगवां के हिरौंदी सेक्टर में पदस्थ इंजीनियर सतीश समेले भ्रष्टाचार के आरोप में अक्सर सुर्खियों में रहे हैं। उन पर आरोप है कि उन्होंने कमीशन की राशि दूसरों के फोनपे नंबर पर ली थी। इसके अलावा कई पंचायतों में भ्रष्टाचार किया है। इसी मामले में जिला पंचायत सीईओ ने नोटिस जारी करते हुए जवाब तलब किया था। जवाब समाधानकारक नहीं पाए जाने पर सीईओ ने सेक्टर से हटाकर आरईएस कार्यालय अटैच कर दिया गया। जिसके बाद उन्होंने मीडिया के माध्यम से अधिकारियों पर आरोपों की बौछार कर दी।



