ग्वालियरमध्य प्रदेश

घुटनों के दर्द से मिलेगी परमानेंट मुक्ति, एम्स भोपाल और ग्वालियर आयुर्वेद संस्थान मिलकर खोजेंगे अचूक इलाज

ग्वालियर
 घुटनों के दर्द (आस्टियोआर्थराइटिस) से जूझ रहे मरीजों के लिए अच्छी खबर है। एम्स भोपाल और क्षेत्रीय आयुर्वेद अनुसंधान संस्थान ग्वालियर मिलकर इस बीमारी का समाधान खोज रहे हैं। जल्द ही दोनों संस्थानों के बीच आधिकारिक समझौता होने वाला है, जो जोड़ों के दर्द के इलाज की दिशा बदल सकता है।

केंद्रीय आयुर्वेदिक विज्ञान अनुसंधान परिषद (सीसीआरएएस) आयुष मंत्रालय से इस रिसर्च प्रोजेक्ट की अनुमति मिल गई है। शोध का मुख्य उद्देश्य यह पता लगाना है कि घुटने के आस्टियोआर्थराइटिस के इलाज में पारंपरिक आयुर्वेदिक औषधियां, आधुनिक एलोपैथी की तुलना में कितनी सुरक्षित और असरदार हैं। शोध का मुख्य कार्यक्षेत्र एम्स भोपाल रहेगा, जहां की आधुनिक लैब और डाक्टरों की देखरेख में मरीजों पर आयुर्वेदिक उपचार के प्रभावों का बारीकी से अध्ययन किया जाएगा।

यह रिसर्च आधुनिक मानकों पर आधारित होगी, ताकि इसके परिणामों पर भरोसा किया जा सके। एम्स भोपाल के अस्थिरोग विभाग के प्रोफेसर डा. रेहान उल हक प्रोजेक्ट का नेतृत्व करेंगे। वहीं क्षेत्रीय आयुर्वेद अनुसंधान संस्थान ग्वालियर के विशेषज्ञ डा. अनिल मंगल इसके सह-अन्वेषक और कोआर्डिनेटर होंगे।

मरीजों को क्या होगा फायदा?

    इस शोध से मरीजों को पता चलेगा कि आयुर्वेद की कौन-सी दवाएं विज्ञानी रूप से सुरक्षित हैं।

    अगर आयुर्वेदिक औषधियां प्रभावी साबित होती हैं, तो मरीजों को पेन-किलर (दर्द निवारक दवाओं) के दुष्प्रभावों से मुक्ति मिल सकती है।

    यह रिसर्च गठिया और जोड़ों के दर्द के उपचार का तरीका बदल सकती है।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button