इंदौरमध्य प्रदेश

इंदौर में एआई-सैटेलाइट मॉडल से तय होगी जमीन की दरें, प्रस्ताव तैयार किया जा रहा है

 इंदौर

आगामी वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए जिले में संपत्तियों की गाइडलाइन दरों में बड़े बदलाव की तैयारी शुरू हो गई है। शासन से प्राप्त ऑनलाइन डाटा और स्थानीय स्तर पर एकत्र जानकारी का आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) तकनीक से विश्लेषण कर नई गाइडलाइन का प्रस्ताव तैयार किया जा रहा है।

प्रस्ताव अप्रैल से लागू होने वाली नई दरों का आधार बनेगा। पंजीयन विभाग ने पहली बार एआई और सैटेलाइट इमेजरी के आधार पर नई गाइडलाइन तैयार करना शुरू किया है। इससे नए विकास का सही आकलन हो सकेगा और जमीन का मूल्य वास्तविक बाजार के अनुरूप हो सकेगा।

संपत्ति सौदों का अध्ययन किया गया

उप पंजीयन कार्यालयों में वर्तमान वित्तीय वर्ष के दौरान हुए संपत्ति सौदों का विस्तृत अध्ययन किया गया है। जिन स्थानों पर जमीन या संपत्ति की खरीद-फरोख्त तय गाइडलाइन दर से अधिक मूल्य पर हुई है, वहां दर बढ़ाने की सिफारिश की जा रही है।

विशेष रूप से ऐसी लोकेशन को बढ़ोतरी में शामिल किया जा रहा है, जहां 10 प्रतिशत से अधिक दस्तावेज गाइडलाइन दर से ऊंचे मूल्य पर पंजीकृत हुए हैं। एआई तकनीक से बढ़ोतरी वाली लोकेशन का आकलन किया जा रहा है। अनुमान है कि जिले में तीन हजार से अधिक लोकेशन पर दरों में बढ़ोतरी होगी।
मार्च में शासन को भेजेंगे प्रस्ताव

वर्तमान में उप पंजीयन कार्यालयों में गाइडलाइन का प्रस्ताव तैयार किया जा रहा है। एसडीएम की अध्यक्षता वाली समितियों की बैठक में स्वीकृति के बाद प्रस्ताव जिला मूल्यांकन समिति को भेजा जाएगा। यहां पर स्वीकृति के बाद दावे-आपत्ति बुलाकर निराकरण कर प्रस्ताव को शासन को भेजा जाएगा। केंद्रीय मूल्यांकन समिति पूरे प्रदेश के प्रस्तावों का निराकरण कर प्रस्ताव स्वीकृति के लिए शासन को भेजेगी और इसके बाद नई दरें लागू होंगी।

270% तक बढ़ी थीं दरें

मौजूदा वित्त वर्ष में भी कई क्षेत्रों में गाइडलाइन दरों में 20 से लेकर 270 प्रतिशत तक बढ़ोतरी की गई थी। सबसे ज्यादा वृद्धि ग्रामीण क्षेत्रों की कृषि भूमि में देखी गई थी। अधिक कीमत पर रजिस्ट्रियां होने और भूमि अधिग्रहण से जुड़े विरोध को ध्यान में रखते हुए यह बदलाव किए गए थे।

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