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IIT वैज्ञानिकों का दावा: धीरे-धीरे ढही थी सिंधु घाटी सभ्यता, अचानक खत्म होने का मिथक टूटा

नई दिल्ली 
उन्नत, समृद्ध और बेहद रहस्यमय मानी जाने वाली प्राचीन सिंधु घाटी सभ्यता के निशान भारत और पाकिस्तान में पाए जाते हैं। यह आज भी रहस्य बना हुआ है कि आखिर इतनी उन्नत सभ्यता गायब कैसे हो गई? हड़प्पा, मोहनजोदड़ो, लोथल और राखीगढ़ी तक इस सभ्यता के नमूने पाए गए हैं। सभ्यता के खात्मे को लेकर अब तक कई तरह के दावे किए गए हैं। इनमें महामारी, बाढ़, भूकंप और उल्कापात जैसी कई बातें की जाती रही हैं। अब आईआईटी गांधीनगर के वैज्ञानिकों ने दावा किया है कि लंबे समय तक सूखे के प्रकोप के चलते यह सभ्यता नष्ट हो गई।
 
सिंधु घाटी सभ्यता को सिंधु-सरस्वती सभ्यता के नाम से भी जानते हैं। यह सभ्यता 5000 से 3500 ईसा पूर्व तक फलती-फूलती थी। यह सभ्यता अपने शहरों के लिए जानी जाती है। खुदाई में मिले अवशेषों और शहरों को देखकर पता चलता है कि उनके शहर और पानी निकासी का सिस्टम और सड़कें कितनी उन्नत थीं। इसके अलावा वे धातु का भी उपयोग जानते थे। रोजमर्रा के इस्तेमाल में मिट्टी के बर्तन ही लाए जाते थे। इस सभ्यता के लोग खेती पर निर्भर थे और वे अनाज को लंबे समय तक सुरक्षित रखना भी जानते थे।

आईआईटी गांधीनगर में विमल मिश्रा की अगुआई में शोध में पाया गया कि इस सभ्यता को लगातार सूखे का सामना करना पड़ा। सभ्यता का पतन अचानक नहीं हुआ बल्कि यह धीरे-धीरे समाप्त हो गई। 11 पन्ने के रिसर्च पेपर में दावा किया गया है कि पानी की कमी की वजह से ही बहुत सारे लोगों की मौत हो गई और कुछ पलायन भी कर गए। सिंधु सभ्यता सिंधु नदी पर ही आधारित थी। इस पानी से वे खेती करते थे। मॉनसून और मौसम की गतिविधियों में परिवर्तन की वजह से बारिश में 10 से 20 फीसदी की गिरावट आ गई थी। वहीं औसत तापमान 0.5 डिग्री बढ़ गया। 85 साल में कम से कम चार बेहद गंभीर सूखे पड़े। एक बार तो 164 साल का सूखा पड़ गया जिसमें सभ्यता नष्ट हो गई।

नदियों में पानी की कमी
बारिश कम होने की वजह से नदियां भी सूखने लगी थीं। आर्कियो बोटैनिकल तथ्यों के मुताबिक पानी की कमी की वजह से सिंधु सभ्यता के लोगों ने गेहूं और अन्य अनाजों को छोड़कर दूसरी फसलों को उगाने की कोशिश की लेकिन वे नाकामयाब हो गए। पुरानी झीलों और गुफाओं के सर्वे से पता चलता है कि इस क्षेत्र में पानी की तेजी से कमी हो रही थी। लगभग दो शताब्दी तक चले सूखे ने पूरी सभ्यता को हिलाकर रख दिया। धीरे-धीरे बड़े-बड़े शहर छोटे कबीलों में बदल गए।

रिसर्च में पाया गया है कि उत्तरी अटलांटिक में ठंड बढ़ने से भारत का मॉनसून कमजोर होने लगा था। प्रशांत और हिंद महासागर का तापमान बढ़ने की वजह से बारिश कम होने लगी। समुद्र गर्म होने की वजह से धरती से तापमान का अंतर कम हो गया और मॉनसून कमजोर होने लगा। ऐसे में मौसम पूरी तरह बदल गया। लोग कम बारिश की वजह से सिंधु नदी के पास ही बसने लगे। धीरे-धीरे कम होती आबादी, कृषि की बर्बादी और खाद्यान्न की कमी की वजह से सभ्यता का पतन होता चला गया।

 

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