गुंडे बने मुर्गा, पुलिस ने उत्तरी हेकड़ी…

सतना। जेल से बाहर आते ही फूल-मालाओं के साथ जुलूस निकालकर खुद को बाहुबली समझने वाले हत्या के आरोपियों की हेकड़ी आखिरकार कोलगवां पुलिस ने निकाल दी। सडक़ पर काफिला निकालकर अपनी ताकत और दहशत का प्रदर्शन करने वालों को जब पुलिस ने कानून का सामना कराया तो उनके तेवर ढीले पड़ गए। जिस अंदाज में आरोपी मंगलवार की शाम सडक़ पर रौब झाड़ रहे थे, पुलिस की कार्रवाई के बाद उसी अंदाज में उनकी दबंगई का गुबार निकलता नजर आया। पुलिस ने आरोपियों का जुलूस निकालकर साफ संदेश दिया कि कानून किसी की निजी जागीर नहीं है और न ही किसी को अपराध की दहशत के दम पर समाज में रौब जमाने की छूट दी जा सकती है।
मामला केवल जुलूस निकालकर शक्ति प्रदर्शन करने तक सीमित नहीं रहा। आरोप है कि सत्यम शुक्ला हत्याकांड के मुख्य आरोपी मान सिंह सिंगरौल उर्फ बेटू ने अपने साथियों के साथ मिलकर हत्याकांड के चश्मदीद गवाह को ही पिस्टल दिखाकर धमका दिया। गवाह को अदालत में बयान देने से रोकने के लिए जान से मारने तक की धमकी दी गई। पुलिस ने इस मामले में मुख्य आरोपी मान सिंह सिंगरौल और उसके साथी अंकित रजक को गिरफ्तार किया है। वहीं क्षेत्र में भय और अशांति फैलाने की कोशिश कर रहे दो अन्य साथियों कृष्णा द्विवेदी और शिवम यादव पाल को भी निवारक कार्रवाई के तहत गिरफ्तार किया गया। चारों आरोपियों को न्यायालय में पेश किया गया जहां से उन्हें जेल भेज दिया गया।
गवाह को दी जान से मारने की धमकी
पुलिस के मुताबिक 4 नवंबर को सिद्धार्थ नगर निवासी सतेन्द्र तिवारी 32 वर्ष ने कोलगवां थाने में शिकायत दर्ज कराई। सतेन्द्र तिवारी सितंबर 2025 में हुए 16 वर्षीय सत्यम शुक्ला हत्याकांड के चश्मदीद गवाह हैं। इस मामले में 5 नवंबर को न्यायालय में उनकी गवाही होनी थी। आरोप है कि गवाही से ठीक एक दिन पहले मान सिंह सिंगरौल उर्फ बेटू अपने साथी अंकित रजक और गगन यादव उर्फ गोलू के साथ उनके घर पहुंचा। आरोपियों ने उन्हें घर से बाहर बुलाकर अदालत में गवाही नहीं देने का दबाव बनाया। इस दौरान मान सिंह ने कथित तौर पर पिस्टल दिखाकर धमकाया कि उसके साथी अभी जेल में हैं, इसलिए वह अदालत में गवाही देने न जाए। इतना ही नहीं, आरोपियों ने चेतावनी दी कि यदि उसने गवाही दी या उनके मुताबिक बयान नहीं बदला तो उसका अंजाम भी सत्यम शुक्ला जैसा होगा। फरियादी की शिकायत पर पुलिस ने धारा 232(ए), 351(3), 3(5) बीएनएस के तहत मामला दर्ज किया। विवेचना के दौरान साक्ष्यों के आधार पर धारा 353 बीएनएस और मोटर व्हीकल एक्ट की धारा 184 का इजाफा किया गया। गौरतलब है कि सत्यम शुक्ला हत्याकांड में करीब 14 महीने जेल में रहने के बाद मान सिंह सिंगरौल उर्फ बेटू जमानत पर बाहर आया था। जेल से निकलते ही समर्थकों ने फूल-मालाओं से उसका स्वागत किया और फिर बोलेरो सहित वाहनों के काफिले के साथ शहर में जुलूस निकाला गया। सोशल मीडिया पर सामने आए वीडियो में आरोपी का जीप के बोनट पर बैठकर सिगरेट पीते हुए रौब झाडऩा और समर्थकों का शक्ति प्रदर्शन चर्चा का विषय बना था। एक हत्याकांड के आरोपी का इस तरह जश्न मनाना और सडक़ पर दबंगई का प्रदर्शन करना लोगों को नागवार गुजरा था।
वायरल वीडियो
बीच-बचाव करने पहुंचे नाबालिग के सीने में मारी थी गोली
गौरतलब है कि 4 सितंबर 2025 को बिरला रोड स्थित एफसीआई गोदाम के पास पुराने विवाद के दौरान 16 वर्षीय सत्यम शुक्ला बीच-बचाव करने पहुंचा था। इसी दौरान उसके सीने में गोली मार दी गई थी, जिससे उसकी मौत हो गई थी। इस हत्याकांड ने पूरे शहर को झकझोर दिया था। मामले में मान सिंह सिंगरौल समेत अन्य आरोपियों को गिरफ्तार किया गया था। करीब 14 महीने बाद जमानत पर बाहर आने के बाद फूल-मालाओं के साथ जुलूस निकालना और फिर चश्मदीद गवाह को धमकाने का मामला सामने आने से आरोपियों की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े हुए।
पुलिस ने कराई जेल वापसी
कोलगवां थाना प्रभारी निरीक्षक सुदीप सोनी के नेतृत्व में पुलिस टीम ने कार्रवाई करते हुए चारों आरोपियों को गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया जहां से उन्हें जेल भेज दिया गया। यह कार्रवाई पुलिस अधीक्षक हंसराज सिंह के निर्देशन तथा अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक पीएल कुर्वे और नगर पुलिस अधीक्षक मनीष त्रिपाठी के मार्गदर्शन में की गई। इस पूरे घटनाक्रम ने एक बार फिर स्पष्ट कर दिया कि जमानत पर जेल से बाहर आना कानून से ऊपर हो जाना नहीं है। अदालत से मिली राहत का मतलब यह नहीं कि कोई व्यक्ति गवाहों को धमकाए, पिस्टल दिखाकर दहशत फैलाए या सडक़ों पर शक्ति प्रदर्शन कर खुद को कानून से बड़ा समझने लगे।



