उत्तर प्रदेशराज्य

पीलीभीत में 200 एकड़ में बनेगा बायो-फार्मा पार्क

योगी सरकार पीलीभीत में 200 एकड़ में बनाएगी बायो-फार्मा पार्क, नया औद्योगिक इकोसिस्टम तैयार करने की योजना

– भरा पचपेड़ा में 951 एकड़ से अधिक भूमि पर विकसित हो रहा औद्योगिक क्षेत्र, इंसुलिन और मोनोक्लोनल एंटीबॉडीज के निर्माण को बढ़ावा
 
– नेपाल सीमा से निकटता और बेहतर रेल कनेक्टिविटी से निवेशकों को मिलेगा फायदा

– फार्मा फॉर्मूलेशन से बायो मैन्युफैक्चरिंग तक निवेश और अनुसंधान को मिलेगा बढ़ावा

लखनऊ
योगी सरकार प्रदेश को फार्मास्युटिकल और बायोटेक्नोलॉजी मैन्युफैक्चरिंग का प्रमुख केंद्र बनाने की दिशा में लगातार काम कर रही है। इसी के तहत योगी सरकार ने प्रदेश के तराई क्षेत्र पीलीभीत को बायो-फार्मा उद्योग के नए केंद्र के रूप में विकसित करने की दिशा में बड़ा कदम आगे बढ़ाया है। सीएम योगी की मंशा के अनुरुप उत्तर प्रदेश राज्य औद्योगिक विकास प्राधिकरण (यूपीसीडा) की ओर से पीलीभीत की तहसील अमरिया के भरा पचपेड़ा में 951.79 एकड़ क्षेत्र में आधुनिक औद्योगिक क्षेत्र विकसित किया जा रहा है। इसमें 200 एकड़ भूमि बायो-फार्मा पार्क के लिए चिह्नित की गई है। पार्क में वैक्सीन, इंसुलिन, जीन थेरेपी और मोनोक्लोनल एंटीबॉडीज जैसी आधुनिक जैविक औषधियों के निर्माण को बढ़ावा दिया जाएगा। इसके माध्यम से प्रदेश में बायोटेक्नोलॉजी आधारित विनिर्माण, अनुसंधान और नवाचार के लिए एक नया औद्योगिक इकोसिस्टम तैयार करने की योजना है।

951.79 एकड़ में विकसित किया जा रहा औद्योगिक क्षेत्र
उत्तर प्रदेश प्रमोट फार्मा काउंसिल के डायरेक्टर एवं विशेष विशेषज्ञ डॉ. जीएन सिंह ने बताया कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का जोर प्रदेश में औद्योगिक विकास को केवल बड़े शहरों तक सीमित रखने के बजाय क्षेत्रीय स्तर पर भी निवेश और रोजगार के नए अवसर विकसित करने पर है। इसी सोच के अनुरूप पीलीभीत जैसे तराई क्षेत्र में बड़े औद्योगिक प्रोजेक्ट को आगे बढ़ाया जा रहा है। योगी सरकार का प्रयास है कि प्रदेश में दवा और जैव प्रौद्योगिकी से जुड़े उत्पादों का निर्माण हो, जिससे निवेश के साथ-साथ स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के अवसर भी पैदा हों। बायो-फार्मा पार्क इसी दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने बताया कि भरा पचपेड़ा में औद्योगिक क्षेत्र को कुल 951.79 एकड़ में विकसित किया जा रहा है। इसमें 575.79 एकड़ औद्योगिक भूखंड, 60.98 एकड़ कॉमन फैसिलिटी, 109.23 एकड़ ग्रीन एरिया और 96.20 एकड़ सड़क नेटवर्क के लिए निर्धारित किए गए हैं। इसके अतिरिक्त आबादी क्षेत्र और अन्य श्रेणियों के लिए भी भूमि का प्रावधान किया गया है। औद्योगिक क्षेत्र में फिलहाल 14 भूखंड आवंटन के लिए उपलब्ध हैं। वहीं 200 एकड़ में बायो फार्मा पार्क विकसित किया जा रहा।

फार्मा फॉर्मूलेशन और बायो मैन्युफैक्चरिंग को मिलेगा बढ़ावा
काउंसिल के डायरेक्टर डॉ. जीएन सिंह ने बताया कि पीलीभीत में बायो-फार्मा पार्क को फार्मा फॉर्मूलेशन और बायोटेक्नोलॉजी आधारित उत्पादन की आवश्यकताओं के अनुरूप विकसित किया जाएगा। यहां वैक्सीन, इंसुलिन, जीन थेरेपी और मोनोक्लोनल एंटीबॉडीज के निर्माण से जुड़ी इकाइयों को प्रोत्साहित किया जाएगा। ये सभी उत्पाद आधुनिक चिकित्सा और गंभीर बीमारियों के उपचार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। ऐसे में पार्क के विकसित होने से प्रदेश में उच्च तकनीक आधारित औषधि निर्माण की संभावनाएं बढ़ेंगी। उन्होंने बताया कि पीलीभीत का तापमान और यहां की जलवायु बायो-फॉर्मूलेशन से जुड़ी गतिविधियों के लिए अनुकूल मानी जा रही है। जैविक औषधियों के निर्माण और उनके भंडारण में तापमान का विशेष महत्व होता है। ऐसे में इस क्षेत्र की भौगोलिक और जलवायु संबंधी परिस्थितियां बायो-फार्मा उद्योग के लिए उपयोगी होगी।

नेपाल सीमा से निकटता और बेहतर कनेक्टिविटी बनेगी ताकत
पीलीभीत की भौगोलिक स्थिति भी परियोजना के लिए महत्वपूर्ण है। यहां से नेपाल सीमा की निकटता के साथ मजबूत रेलवे कनेक्टिविटी उपलब्ध है। इसके अलावा यह क्षेत्र बरेली और लखनऊ जैसे प्रमुख शहरों से भी जुड़ा हुआ है। भरा पचपेड़ा औद्योगिक क्षेत्र पीलीभीत शहर से लगभग 36 किलोमीटर, बरेली से 100 किलोमीटर और लखनऊ तथा दिल्ली से करीब 300 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। इससे कच्चे माल की आपूर्ति, तैयार उत्पादों के परिवहन और औद्योगिक गतिविधियों को गति मिलेगी। नेपाल सीमा से निकटता के कारण भविष्य में निर्यात और क्षेत्रीय व्यापार के लिहाज से भी यह क्षेत्र महत्वपूर्ण है। परियोजना की खास बात यह है कि यहां केवल औद्योगिक इकाइयां स्थापित करने तक ही योजना सीमित नहीं है। बायोटेक्नोलॉजी के क्षेत्र में कुशल मानव संसाधन तैयार करने के लिए विशेष प्रयास किए जाएंगे। इसके तहत बायोटेक्नोलॉजी टेक्नोलॉजी इंस्टीट्यूट के विकास के साथ स्किल डेवलपमेंट और इंक्यूबेशन के लिए विशेष विंग स्थापित करने की योजना है। इससे बायोटेक्नोलॉजी और फार्मा क्षेत्र में प्रशिक्षण, नई तकनीकों के विकास और स्टार्टअप गतिविधियों को प्रोत्साहन मिल सकेगा। स्थानीय युवाओं को उद्योगों की जरूरत के अनुरूप प्रशिक्षण देकर रोजगार से जोड़ने में भी मदद मिलेगी।

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