
रायपुर.
छत्तीसगढ़ में लगातार बारिश से बनी बाढ़ की स्थिति से कई जगहों पर हुए फसल नुकसान पर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने किसानों को बड़ा दिलाया दिया है. उन्होंने कहा कि फसल नुकसान का सर्वे होगा. हम स्वयं आकलन करने जा रहे हैं. आकलन के बाद मुआवजा दिया जाएगा.
सुकमा के लिए रवाना होने से पहले मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने मीडिया से चर्चा में कहा कि बारिश की कारण कई जगह पर बाढ़ की स्थिति बनी है. बाढ़ प्रभावित क्षेत्र के लोगों से मुलाकात करने जा रहे हैं. फसल, मकान का नुकसान हुआ है. पीड़ित लोगों से मुलाकात करेंगे. वहीं सिंगापुर दौरे को लेकर मुख्यमंत्री ने कहा कि नई उद्योग नीति आने के बाद देश-विदेश में इन्वेस्टर मीट का आयोजन किया जा रहा है. इस कड़ी में 4, 5 और 6 अक्टूबर को सिंगापुर प्रवास पर रहेंगे. पिछले तीन दिन में हुई बारिश, अंधड़ से धान फसल को नुकसान हुआ है। जिले के सभी ब्लॉक में अच्छी बारिश होने से कहीं खेतों मंे फसल झुकी हुई है तो कहीं पानी में डूबी हुई है। फिलहाल राजस्व विभाग व पीएम फसल बीमा योजना के अधिकृत इंश्योरेंस कंपनी की ओर से सर्वे शुरु नहीं हो पाया है। बालोद से बघमरा, ओरमा, मेड़की, खरथुली, भोथली मार्ग किनारे कई खेतों में धान की फसल झुकी हुई है। इसी तरह डौंडीलोहारा से मालीघोरी, दुधली से पाररास, जुंगेरा, तरौद, लाटाबोड़, सिकोसा, गुंडरदेही क्षेत्र में भी ऐसी स्थिति है।
अभी सर्वे नहीं हो पाया है, इस वजह से कितने एकड़ में लगी फसल को कितना नुकसान हुआ है, यह स्पष्ट नहीं है। किसान गजेंद्र सार्वा, नारायण साहू, पीयूष साहू, दिलीप साहू, लोकेंद्र हिरवानी ने बताया कि अब तक नुकसान का आंकलन करने सर्वे करने खेतों में कोई नहीं पहुंचे है। राजस्व व कृषि विभाग के अनुसार फसल को 33% से कम नुकसान होने पर आरबीसी 6-4 के तहत प्रभावित किसानों को राज्य शासन की ओर से सहायता राशि नहीं मिलती। 33% या इससे ज्यादा नुकसान होने की स्थिति में सहायता राशि देने का प्रावधान है। सर्वे कर रिपोर्ट जल्द भेजी जाए।
कृषि विभाग के मुताबिक 1.5 लाख में से सिर्फ 2670 किसानों को लाभ पीएम फसल बीमा योजना के तहत पंजीयन करवाने के बावजूद मुआवजा मिलने की गारंटी नहीं रहती। एक साल पहले पंजीकृत किसानों में से सिर्फ 2.53% किसानों को मुआवजा सहायता राशि मिल पाया था। कृषि विभाग के अनुसार एक साल पहले खरीफ सीजन में प्रधानमंत्री बीमा योजना के अंतर्गत सिर्फ 2 हजार 670 और रबी सीजन में 3 हजार 412 किसानों को पीएम बीमा योजना के तहत मुआवजा राशि मिला था। जबकि खरीफ सीजन में एक लाख 5 हजार 867 किसानों ने पंजीयन कराया था। वहीं रबी सीजन में 11 हजार 591 किसानों ने पंजीयन कराया था। इस साल खरीफ सीजन में एक लाख से ज्यादा किसानों ने पंजीयन कराया है। जानिए, रबी की तुलना में खरीफ में 10 गुना किसान पंजीयन कराते हैं प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत हर साल खरीफ सीजन में औसतन 10-11 करोड़ रुपए प्रीमियम राशि जमा कर जिले के लगभग एक साल किसान पंजीयन करवाते है।
अधिकांश किसान धान के लिए पंजीयन कराने विभागीय प्रक्रिया पूरी करते है लेकिन रबी सीजन में धान का पंजीयन नहीं होने की वजह से स्थिति दूसरी रहती है। खरीफ की तुलना में रबी में 10 गुना कम किसान ही पंजीयन करवाते है। नुकसान होने की स्थिति में फसल कटाई प्रयोग के आधार पर सहायता राशि उपलब्ध कराने की बातें विभागीय अफसर कह रहे है। प्राकृतिक विपदा के कारण उपज में होने वाले नुकसान का आंकलन फसल कटाई प्रयोग से किया जाता है। बीमा कराने वाले पंजीकृत किसान को ही मुआवजा देने का प्रावधान आरबीसी 6-4 के तहत शासन से राशि स्वीकृत होने के बाद प्रभावित किसानों को सहायता राशि उपलब्ध कराया जाता है। वहीं ऐसे किसान जो पीएम फसल बीमा योजना के तहत पंजीयन करवाए है और 33% से कम नुकसान हुआ है तो इंश्योरेंस कंपनी की ओर से सहायता राशि उपलब्ध कराया जाएगा। अपर कलेक्टर अजय किशोर ने बताया कि जिले में अच्छी बारिश हुई है लेकिन फिलहाल मेरी जानकारी में जिले में फसल नुकसान होने की अभी कोई सूचना नहीं मिली है। जहां नुकसान की सूचना मिलेगी, वहां पटवारी, आरआई जाकर सर्वे करेंगे। नुकसान की स्थिति में किसानों को नियमानुसार मुआवजा, सहायता राशि मिलेगी।



