विट्स बोले तो विंध्य इंस्टिट्यूट ऑफ टॉर्चर एंड साइंस!
विट्स कॉलेज का नाम सामने आने पर पुलिस ने साधारण धाराओं में केस दर्ज कर कर दी लीपापोती... फिजिकल रिलेशन नहीं बनाने पर छात्राओं के गिरोह ने युवती को बुरी तरह पीटा और सोशल मीडिया में वीडियो वायरल किया

सतना। सतना स्थित विट्स कॉलेज का प्रबंधन भले ही टेक्नोलॉजी और साइंस की शिक्षा देने का दावा करता हो, लेकिन कॉलेज से जुड़े छात्र-छात्राओं पर सामने आए गंभीर आरोपों ने संस्थान की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। हाल ही में सामने आए एक मामले में कॉलेज में पढ़ने वाली 19 वर्षीय छात्रा के साथ कुछ छात्राओं द्वारा मारपीट करने, उसे एक युवक से कथित रूप से फिजिकल रिलेशन बनाने के लिए दबाव डालने और घटना का वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर वायरल करने के आरोप सामने आए हैं। शिकायत के बाद कोलगवां थाना पुलिस ने चार लड़कियों के खिलाफ साधारण मारपीट का प्रकरण दर्ज किया। आरोप है कि घटना में मारपीट के अलावा धमकी, जबरन रोकना, दबाव बनाना और वीडियो प्रसारित करने जैसे गंभीर पहलुओं की भी जांच होनी चाहिए थी।
बताया जाता है कि कॉलेज में पढ़ने वाली छात्रा को श्रवण सेन नामक युवक व्हाट्सएप मैसेज के जरिए परेशान करता था। छात्रा ने कथित तौर पर उसे फटकार दिया। इसके बाद आरोप है कि युवक ने कुछ लड़कियों के माध्यम से योजनाबद्ध तरीके से छात्रा को सुनसान स्थान पर बुलवाया और उसके साथ मारपीट कराई। इतना ही नहीं, वीडियो कॉल के माध्यम से उससे माफी भी मंगवाई गई। शिकायत के बाद पुलिस ने चार लड़कियों के विरुद्ध मारपीट की धाराओं में प्रकरण दर्ज किया।
आरोप यह भी है कि छात्रा पर फिजिकल रिलेशन बनाने का दबाव बनाया गया और मारपीट का वीडियो रिकॉर्ड कर सोशल मीडिया पर प्रसारित किया गया। ऐसे में घटना के सभी पहलुओं की जांच किए जाने की जरूरत है। यदि जांच में जबरन रोकने, धमकी देने, गंभीर चोट पहुंचाने, महिला की गरिमा भंग करने अथवा आपत्तिजनक सामग्री के इलेक्ट्रॉनिक प्रसारण जैसे आरोप प्रमाणित होते हैं तो संबंधित कानूनों के तहत कार्रवाई का सवाल उठता है। केवल मारपीट की साधारण धाराओं में प्रकरण दर्ज किए जाने से पुलिस की कार्रवाई पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
सोशल ग्रुप का मकसद क्या
छात्रा के साथ कथित तौर पर मारपीट करने वाली चारों लड़कियां जीसी नामक ग्रुप चलाती हैं? आरोप है कि इस ग्रुप में लड़कियों को जोड़ा जाता है और उन्हें लड़कों के साथ पेयर बनाया जाता है। जो लड़की इसका विरोध करती है, उसके साथ कथित तौर पर इसी तरह मारपीट की जाती है। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। यह भी कहा जा रहा है कि पूर्व में कुछ लड़कियों के साथ ऐसी घटनाएं हुईं, लेकिन शिकायत पुलिस तक नहीं पहुंची। ऐसे आरोपों की सत्यता सामने लाने के लिए पुलिस को ग्रुप की गतिविधियों, मोबाइल चैट, कॉल रिकॉर्ड, वीडियो और अन्य डिजिटल साक्ष्यों की जांच करनी चाहिए।
इस घटना में सिर्फ मारपीट नहीं, अपहरण, धमकी, प्राइवेसी भंग और वीडियो वायरल करना भी शामिल है, इसलिए इसमें कई गंभीर धाराएं लगनी चाहिए। जिससे इस तरह के कार्य करने वालों के हौसले टूटे।
इस मामले में लगने वाली मुख्य धाराएं – BNS के अनुसार
1. अपहरण और बंधक बनाने के लिए:
– धारा 140(1)/140(2) — इसे सीधे अपहरण की सामान्य धारा बताना सही नहीं है। धारा 140 विशेष परिस्थितियों में अपहरण/अभिक्रमण से संबंधित है, जैसे हत्या के उद्देश्य से अपहरण, फिरौती अथवा गंभीर नुकसान के लिए अपहरण आदि। घटना के वास्तविक उद्देश्य और साक्ष्यों के आधार पर ही इसका निर्धारण होगा।
– धारा 127 — गलत तरीके से परिरोध/रोककर रखने की स्थिति में संबंधित उपधारा लागू हो सकती है। यदि छात्रा को उसकी इच्छा के विरुद्ध घेरकर या रोककर रखा गया था तो इस पहलू की जांच जरूरी है।
2. मारपीट और चोट के लिए:
– धारा 115(2) — स्वेच्छा से चोट पहुंचाने के मामले में लागू हो सकती है। BNS में धारा 115 चोट पहुंचाने से संबंधित है।
– धारा 118(1) — खतरनाक हथियार या साधन से चोट पहुंचाने का आरोप मेडिकल और घटना के तथ्यों से प्रमाणित होने पर लागू हो सकती है।
– धारा 117(2) — गंभीर चोट होने की स्थिति में लागू हो सकती है। गंभीर चोट की श्रेणी में फ्रैक्चर, स्थायी विकृति अथवा निर्धारित अवधि तक गंभीर शारीरिक पीड़ा जैसी स्थितियां शामिल हैं।
3. धमकी, दबाव और यौन उत्पीड़न के लिए:
– धारा 351(2), 351(3) — आपराधिक धमकी के आरोपों के संदर्भ में परिस्थितियों के अनुसार लागू हो सकती हैं।
– धारा 74 — महिला की लज्जा भंग करने के आशय से हमला या आपराधिक बल प्रयोग का आरोप प्रमाणित होने पर विचारणीय हो सकती है।
– धारा 79 — महिला की लज्जा का अनादर करने के आशय से शब्द, संकेत या कृत्य किए जाने के आरोप में परिस्थितियों के अनुसार लागू हो सकती है।
4. वीडियो बनाकर वायरल करने के लिए:
– धारा 356(2) — मानहानि से संबंधित प्रावधान है। केवल वीडियो वायरल किए जाने मात्र से यह धारा स्वतः लागू नहीं होती; वायरल सामग्री और उसके उद्देश्य के आधार पर कानूनी परीक्षण जरूरी है।
– IT Act की धारा 66E — प्राइवेसी के उल्लंघन से संबंधित है, लेकिन यह तभी लागू होगी जब वीडियो/छवि कानून में निर्धारित निजी क्षेत्र से संबंधित परिस्थितियों को पूरा करती हो। केवल मारपीट का वीडियो बनाने से धारा 66E स्वतः लागू नहीं हो जाती।
– IT Act की धारा 67/67A — इलेक्ट्रॉनिक रूप से अश्लील अथवा यौन रूप से स्पष्ट सामग्री के प्रकाशन/प्रसारण से संबंधित हैं। इसलिए केवल मारपीट का वीडियो वायरल होने पर इन धाराओं को स्वतः लागू मानना सही नहीं होगा। सामग्री की वास्तविक प्रकृति के आधार पर ही इनका परीक्षण किया जाना चाहिए।
5. साजिश के लिए:
– धारा 61(2) — यदि जांच में यह साबित होता है कि आरोपितों ने पहले से मिलकर अपराध करने की योजना बनाई थी, तो आपराधिक साजिश का प्रावधान विचारणीय हो सकता है।
– धारा 3(5) — यदि कई लोगों ने समान आपराधिक आशय के तहत मिलकर कृत्य किया है तो साझा आपराधिक दायित्व के संदर्भ में यह प्रावधान प्रासंगिक हो सकता है।


