मध्य प्रदेशसतना
खुद तो डूबे, बाबू को भी ले डूबे: सात महीने दबी रही निलंबन की फाइल, प्राचार्य व बाबू दोनों सस्पेंड

सतना। शासकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय, सतना के प्रभारी प्राचार्य डॉ. एससी राय से जुड़े मामले में उच्च शिक्षा विभाग ने बड़ी कार्रवाई करते हुए न केवल प्रभारी प्राचार्य को निलंबित किया है, बल्कि फाइल दबाने और शासन के आदेशों की अनदेखी करने वाले मंत्रालय के एक बाबू को भी तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। यह कार्रवाई 7 अगस्त 2026 को जारी अलग-अलग आदेशों के माध्यम से की गई। उच्च शिक्षा विभाग के आदेश के अनुसार, रीवा संभाग के क्षेत्रीय अतिरिक्त संचालक द्वारा की गई जांच में प्रथम दृष्टया यह प्रमाणित पाया गया कि प्रभारी प्राचार्य डॉ. एससी राय ने महाविद्यालय की एक छात्रा के साथ अनुचित वार्तालाप किया। इसके अलावा उन पर पद के दुरुपयोग, अमर्यादित आचरण, स्वेच्छाचारिता और लापरवाही के भी आरोप हैं। इन्हीं आधारों पर उन्हें मध्यप्रदेश सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण तथा अपील) नियम, 1966 के तहत तत्काल प्रभाव से निलंबित कर उनका मुख्यालय क्षेत्रीय अतिरिक्त संचालक, उच्च शिक्षा, रीवा संभाग निर्धारित किया गया है। मामले का दूसरा और अधिक चौंकाने वाला पहलू मंत्रालय से सामने आया।
शासन के दूसरे आदेश में बताया गया कि डॉ. राय को निलंबित करने के लिए 17 फरवरी 2026 को ही प्रशासनिक अनुमोदन प्राप्त हो गया था। इसके बावजूद संचालनालय उच्च शिक्षा, भोपाल में पदस्थ सहायक ग्रेड-3 हर्ष रावत ने अनुमोदन के अनुरूप निलंबन आदेश जारी नहीं किया।

आरोप है कि उन्होंने आदेश का मसौदा प्रस्तुत करने के बजाय फाइल पर विपरीत टिप्पणी दर्ज कर पूरे प्रकरण को अनावश्यक रूप से लगभग सात माह तक लंबित रखा। शासन ने इसे मध्यप्रदेश सिविल सेवा (आचरण) नियमों के विपरीत तथा स्वेच्छाचारिता का परिचायक मानते हुए सहायक ग्रेड-3 हर्ष रावत को भी तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। निलंबन अवधि में उनका मुख्यालय संचालनालय, उच्च शिक्षा, भोपाल रहेगा। इस कार्रवाई ने यह स्पष्ट संदेश दिया है कि गंभीर मामलों में लापरवाही या जानबूझकर फाइल दबाने वाले कर्मचारियों पर भी उतनी ही सख्त कार्रवाई होगी, जितनी मूल आरोपित अधिकारी पर। यही वजह है कि यह मामला अब चर्चा में है।

ऑडियो वायरल होने के बाद एनएसयूआई ने किया था प्रदर्शन

प्रभारी प्राचार्य डॉ. एससी राय से जुड़ा मामला ऑडियो वायरल होने के बाद सुर्खियों में आया था। इसके बाद एनएसयूआई के प्रदेश सचिव आनंद पांडे के नेतृत्व में छात्र संगठन ने बड़ा आंदोलन करते हुए प्राचार्य को हटाने की मांग की थी। प्रदर्शनकारियों ने कॉलेज में सिक रूम के नाम पर एक कमरे में अनैतिक गतिविधियां संचालित किए जाने के आरोप भी लगाए थे। प्रशासन की ओर से कार्रवाई का आश्वासन मिलने के बावजूद जब लंबे समय तक कोई कार्रवाई नहीं हुई तो आनंद पांडे अपने समर्थकों के साथ कॉलेज गेट के बाहर कई दिनों तक धरने पर बैठे रहे। बाद में प्रशासन ने बलपूर्वक धरना समाप्त कराया था। अब करीब सात माह बाद प्राचार्य के निलंबन के साथ मामले में नया मोड़ आया है।



