प्रदर्शनकारियों पर एफआईआर कर घिरी पुलिस: आंदोलन की हर तस्वीर में मोहमद आरिफ इकबाल का चेहरा फिर भी पुलिस को नहीं आया नजर

सतना। बिरला सीमेंट फैक्ट्री के एक कर्मचारी की संदिग्ध मौत के बाद हुए विरोध-प्रदर्शन को लेकर कोलगवां थाना पुलिस की कार्रवाई सवालों के घेरे में आ गई है। आंदोलन के बाद पुलिस ने कई कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं के खिलाफ एफआईआर दर्ज की, लेकिन आंदोलन की अगुवाई करने वाले शहर कांग्रेस अध्यक्ष मोहम्मद आरिफ इकबाल का नाम एफआईआर में शामिल नहीं किए जाने को लेकर राजनीतिक और सामाजिक हलकों में चर्चाएं तेज हो गई हैं। क्या पुलिस ने मोहम्मद आरिफ को बचाए रखने के लिए यह किया? या फिर पुलिस को सचमुच चेहरा दिखा नहीं।
बताया जा रहा है कि कर्मचारी की मौत के विरोध में कांग्रेस नेताओं और स्थानीय लोगों ने बिरला रोड पर धरना-प्रदर्शन किया था। इस प्रदर्शन के दौरान सड़क पर बैठकर नारेबाजी की गई थी। घटना के बाद पुलिस ने रितेश त्रिपाठी, बालेश त्रिपाठी, गुड्डू परसवारा समेत कई लोगों को नामजद करते हुए मामला दर्ज किया।
हालांकि, प्रदर्शन के फोटो और वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आने के बाद यह सवाल उठ रहा है कि जब शहर कांग्रेस अध्यक्ष आरिफ इकबाल भी धरना-प्रदर्शन में मौजूद थे और कई तस्वीरों में अन्य नेताओं के साथ बैठे दिखाई दे रहे हैं, तो उनका नाम एफआईआर में क्यों नहीं जोड़ा गया। प्रदर्शन की अगुवाई करने के आरोपों के बीच उनके खिलाफ कोई कार्रवाई न होना चर्चा का विषय बना हुआ है। इसी आधार पर लोगों के बीच यह सवाल उठ रहा है कि यदि पुलिस का मानना है कि प्रदर्शन के दौरान कानून-व्यवस्था प्रभावित हुई थी, तो फिर सभी संबंधित लोगों के खिलाफ समान मानदंड अपनाए जाने चाहिए थे। वहीं यदि प्रदर्शन शांतिपूर्ण था, तो अन्य नेताओं पर दर्ज एफआईआर का आधार भी स्पष्ट किया जाना चाहिए।
पुलिस की इस कार्रवाई को लेकर निष्पक्षता पर सवाल उठाए जा रहे हैं। लोगों का कहना है कि कानून की नजर में सभी समान हैं और किसी भी मामले में कार्रवाई तथ्यों एवं साक्ष्यों के आधार पर बिना किसी भेदभाव के होनी चाहिए। अब निगाहें इस बात पर हैं कि पुलिस इस मामले में अपनी स्थिति स्पष्ट करती है या उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आगे कोई नई कार्रवाई करती है।



