साहबों के राज में आदिवासी बने ‘मवेशी’!

सतना। मैहर जिले के जगनगरा और पोडिआ गांव के आदिवासी परिवारों ने शनिवार को अपनी जमीन पर कथित कब्जे के विरोध में अनोखा प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने मुंह में चारा दबाकर प्रशासन के समक्ष विरोध दर्ज कराया और आरोप लगाया कि उनकी जमीन पर जबरन कब्जा कर लिया गया है। उन्होंने मामले की निष्पक्ष जांच कर भूमि वापस दिलाने और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की।

प्रदर्शन कर रहे आदिवासियों का आरोप है कि पूर्व नगर परिषद अध्यक्ष वा भाजपा नेता रामसुशील पटेल ने प्रभाव का इस्तेमाल करते हुए उनकी करीब 39 एकड़ भूमि पर कब्जा कर लिया है। उनका कहना है कि इस जमीन पर वर्षों से उनका अधिकार रहा है, लेकिन अब उन्हें वहां खेती करने से रोका जा रहा है। प्रदर्शनकारियों ने यह भी आरोप लगाया कि उनकी भूमि तक पहुंचने वाला रास्ता भी बंद कर दिया गया है, जिससे उन्हें भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
दबाव बनाने दर्ज करा देते हैं फर्जी मुकदमे
आदिवासियों का कहना है कि जब भी वे अपनी जमीन का अधिकार मांगते हैं या विरोध करते हैं, तब उन्हें झूठे मामलों में फंसाने की कोशिश की जाती है। उनका आरोप है कि कई लोगों को फर्जी प्रकरण दर्ज कर जेल तक भेजा गया है, जिससे गांव के लोगों में भय का माहौल बना हुआ है।
क्या है संदेश
मुंह में चारा दबाकर किए गए इस प्रदर्शन के माध्यम से आदिवासियों ने यह संदेश देने का प्रयास किया कि यदि उनकी जमीन और अधिकार नहीं बचाए गए तो उनकी स्थिति मवेशियों जैसी हो जाएगी। प्रदर्शनकारियों ने प्रशासन से मांग की कि पूरे मामले की राजस्व और पुलिस स्तर पर निष्पक्ष जांच कराई जाए, कब्जे के आरोपों की सत्यता सामने लाई जाए तथा उन्हें उनकी भूमि और आवागमन का रास्ता वापस दिलाया जाए। उधर, इस मामले में जिन पर आरोप लगाए गए हैं, उनका पक्ष सामने नहीं आ सका है। प्रशासन की ओर से भी तत्काल कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है। फिलहाल आदिवासी परिवारों ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों पर शीघ्र कार्रवाई नहीं हुई तो वे आंदोलन को और तेज करेंगे।



