सीईओ मेहरबान तो बिना पोस्टिंग वाला बना पहलवान…
नियमों के विपरीत दिये गए महत्वपूर्ण शाखाओं के प्रभार

सतना। जिला पंचायत में यू तो पदस्थापना के बाद ही अफसरों को प्रभार दिया जाता है, लेकिन वर्तमान समय में एक ऐसे अधिकारी को कई तरह के प्रभार मिले हैं जिनकी कार्यालय में पदस्थापना ही नहीं है। ऐसा इसलिए हो पा रहा है क्योंकि इन्हें प्रमुख अधिकारी का वरदहस्त प्राप्त है। मामला आशीष द्विवेदी का है, जिनका मूल पद ब्लॉक कॉर्डिनेटर का बताया जा रहा है। उन्हें पूर्व में जिला समन्वयक के रूप में स्वच्छ भारत मिशन का प्रभार दिया गया था। हालांकि, हाल ही में शासन द्वारा रजनीश शुक्ला की जिला समन्वयक के पद पर पदस्थापना किए जाने के बाद भी आशीष द्विवेदी जिला पंचायत में कार्यरत हैं और विभिन्न शाखाओं के प्रभार संभाल रहे हैं। सूत्रों के अनुसार, रजनीश शुक्ला की नियुक्ति के बाद स्वच्छ भारत मिशन में की गई। ऐसे में आशीष द्विवेदी का जिला पंचायत में कोई स्थान बचा ही नहीं। फिर भी इसके उलट आशीष द्विवेदी के पास कई महत्वपूर्ण प्रभार बने हुए हैं। इसे लेकर कर्मचारियों और प्रशासनिक हलकों में चर्चा है कि आखिर किस आदेश और किस अधिकार के तहत उन्हें ये जिम्मेदारियां दी जा रही हैं।
जानकारों का कहना है कि यदि किसी पद पर शासन द्वारा नियमित पदस्थापना हो चुकी है, तो पूर्व में प्रभार संभाल रहे अधिकारी को तत्काल कार्यमुक्त किया जाना चाहिए। इसके विपरीत व्यवस्था बनाए रखना प्रशासनिक नियमों और पारदर्शिता पर सवाल खड़े करता है। अब यह मामला जिला पंचायत के भीतर चर्चा का विषय बना हुआ है। कर्मचारियों का कहना है कि यदि शासन के आदेशों का पालन नहीं किया जाएगा तो प्रशासनिक व्यवस्था की निष्पक्षता पर प्रश्नचिह्न लगना स्वाभाविक है। मामले में मुख्य कार्यपालन अधिकारी से स्पष्टीकरण की अपेक्षा की जा रही है हालांकि उन्होंने अभी तक इस मामले में कोई जवाब नहीं दिया।
सभी मलाईदार प्रभार
आशीष द्विवेदी के पास जिला पंचायत में भले ही कोई पद नहीं परन्तु कद यथावत है। उनके पास जिला गौंड खनिज मद, मध्यान्ह भोजन कार्यक्रम और 15वाँ वित्त जैसे प्रमुख प्रभार मिले हैं। क्या इनसे योग्य कोई भी अधिकारी नहीं है। आखिर ऐसी क्या मजबूरी है कि बीसी को नियमों के विपरीत यह प्रभार दिये गए हैं।



