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‘गाड़ी रोकिए, आप ATS की जांच में हैं’… सुनते ही थम गई सांसें, फिर खुला साइबर ठगी का बड़ा खेल

ट्रांसपोर्टर की सतर्कता से बची लाखों की साइबर ठगी, फर्जी कॉल करने वाला लाइन छोड़कर भागा

  • सतना। मैहर में डिजिटल अरेस्ट के नाम पर साइबर ठगी का एक बड़ा प्रयास एक ट्रांसपोर्टर की सूझबूझ से विफल हो गया। खुद को मुंबई एंटी टेररिज्म स्क्वाड (एटीएस) का अधिकारी बताकर साइबर ठग ने 59 वर्षीय ट्रांसपोर्टर को आतंकवादी संगठन से जुड़े होने का डर दिखाया और मानसिक दबाव बनाकर ठगी की कोशिश की। लेकिन पीड़ित ने घबराने के बजाय सीधे मैहर कोतवाली पहुंचकर पुलिस से मदद मांगी। पुलिस के सक्रिय होते ही ठग ने कॉल काट दी और फरार हो गया।

जानकारी के अनुसार सतना के टिकुरिया टोला निवासी 59 वर्षीय ट्रांसपोर्टर संतोष कुमार साहू सोमवार सुबह अपने परिवार के साथ कार से बांधवगढ़ जा रहे थे। मैहर के पास पहुंचने पर उनके मोबाइल पर 7578923689 नंबर से कॉल आया। कॉल करने वाले ने खुद को मुंबई एटीएस का अधिकारी बताते हुए कहा कि उसका रिकॉर्ड मिला है और वह एक आतंकवादी ग्रुप से जुड़ा हुआ है। उसने संतोष साहू को तत्काल गाड़ी रोकने और आगे की कार्रवाई के लिए दूसरे नंबर पर संपर्क करने का निर्देश दिया। ठग ने दावा किया कि दूसरे नंबर पर बात करने से मामला रफा-दफा हो सकता है। दरअसल यह पूरी साजिश डिजिटल अरेस्ट के नाम पर पीड़ित को डराकर पैसे ऐंठने की थी।

घबराए नहीं, सीधे पहुंचे थाने
धमकी मिलने के बाद संतोष साहू कुछ देर के लिए जरूर घबरा गए लेकिन उन्होंने समझदारी दिखाते हुए ठग से कहा कि वह पुलिस थाने जा रहे हैं। इस पर ठग ने भी आत्मविश्वास दिखाते हुए कहा कि जहां जाना है, चले जाओ। संतोष साहू तुरंत अपनी कार मैहर कोतवाली ले गए और पूरी घटना पुलिस को बताई। पुलिसकर्मियों ने उनका मोबाइल लेकर कॉल चालू रखा और नंबर की जांच शुरू कर दी। जैसे ही ठग को एहसास हुआ कि अब पुलिस लाइन पर है, उसने तुरंत कॉल काट दिया। जांच में सामने आया कि इस्तेमाल किया गया नंबर फर्जी था और साइबर ठगी के लिए उपयोग किया जा रहा था।

पुलिस ने दी सतर्क रहने की सलाह
पुलिस लगातार जागरूकता कार्यक्रम के माध्यम से आम जन के बीच यह संदेस पहुंचा रही है कि यदि कोई व्यक्ति खुद को पुलिस, सीबीआई, एटीएस, ईडी या किसी अन्य जांच एजेंसी का अधिकारी बताकर फोन पर डराने डिजिटल अरेस्ट करने या पैसे की मांग करने की कोशिश करे तो घबराएं नहीं। ऐसी किसी भी कॉल की तुरंत नजदीकी पुलिस थाने या साइबर हेल्पलाइन 1930 पर शिकायत करें। यह मामला एक बार फिर साबित करता है कि साइबर ठग अब लोगों को डराकर ठगी करने के नए-नए तरीके अपना रहे हैं लेकिन थोड़ी सतर्कता और समय पर पुलिस से संपर्क कर ऐसे अपराधों से बचा जा सकता है।

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